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काव्य : *रुप चौदस* - अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर


 काव्य : 

*रुप चौदस*

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सज धज श्री शक्ति खड़ी हैं 

 दीपमालिका थाली सजाये;

  हैं डाल पल्लू प्रकाश करतीं 

   रुप चौदस चंद्रमुख छुपाए।


तोरण अशोक,आम्र पल्लव

 झुक कर खड़ी हैं कदलिका;

  ज्योति कलश सजे द्वार पर 

   अभ्यागता लक्ष्मी सागरिका।


आयेंगी धन धान्या देवी रत्ना 

 गृहस्थी को बनाने सुख धाम;

  स्वाद,चक्षु,स्पर्श,ध्वनि से परे 

   वरदान देंगी प्रणव प्रतिसाद।


श्री लक्ष्मी की कृपा वर्षण से

 वैभव उत्स मय प्रारब्ध होगा;

  इहलोक से परलोक जाते हुए 

   पुण्य फल धन उपलब्ध होगा।


नरकासुर वध कर सत्यभामा 

 श्री हरि की श्री शक्ति बनी थी;

  दाम्पत्य में भार्या धर्म निभाने 

   विकल्प योद्धा बन खड़ी थीं।


आह्वान कर दीपो दीवा भव 

 दीप से जला दीपक सजाने;

  श्री शक्ति,शिव,रामत्व जगाने

    पुरा संस्कृति सनातन बचाने।


-अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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