काव्य :
भाई दूज
कुछ बंधन होते हैं सुंदर
रेशमी धागों से गुंथे बंधे;
ममता-दुलार के स्नेहिल
अनुपम रिश्ते में रचे बसे।
यादें संजोए बचपन की
झीना झपटी लड़कपन;
मिलें घर आंगन दहलीज
झांके आंखों में बचपन।
भाई दूज,राखी त्योहार
भाई-बहन पावन प्यार;
शुभ मंगल एक दूजे का
भाई बहन का संस्कार।
यमुना ने यम को जिमाई
दिया बहन स्नेहिल प्यार;
शुभ मंगल कामना करते
बहन किया भाई सत्कार।
यम दुतिया के शुभ दिन पर
बहना के घर भाई जो जाए;
अमृत फल मिलेगा यम का
बहन हाथ जो भोजन पाए।
सफल सुखी हो करे उन्नति
कर्म पथ हो जाए निष्कंटक;
भाई के प्रति बहन शुभेच्छा
कट जाए जीवन का संकट।
सदा बांध रखो संबंधों को
माॅं पिता से बने रक्त संबंध;
जन्म जन्मांतर से है निरंतर
गुणसूत्र का जीवन अनुबंध।
-अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर
Tags:
काव्य

