ad

काव्य : भाई दूज - अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर


 काव्य : 

भाई दूज


कुछ बंधन होते हैं सुंदर 

रेशमी धागों से गुंथे बंधे;

ममता-दुलार के स्नेहिल 

अनुपम रिश्ते में रचे बसे।


यादें संजोए बचपन की 

झीना झपटी लड़कपन;

मिलें घर आंगन दहलीज 

झांके आंखों में बचपन।


भाई दूज,राखी त्योहार 

भाई-बहन पावन प्यार;

शुभ मंगल एक दूजे का

भाई बहन का संस्कार।


यमुना ने यम को जिमाई

दिया बहन स्नेहिल प्यार;

शुभ मंगल कामना करते 

बहन किया भाई सत्कार।


यम दुतिया के शुभ दिन पर

बहना के घर भाई जो जाए;

अमृत फल मिलेगा यम का

बहन हाथ जो भोजन पाए।


सफल सुखी हो करे उन्नति 

कर्म पथ हो जाए निष्कंटक;

भाई के प्रति बहन शुभेच्छा 

कट जाए जीवन‌ का संकट।


सदा बांध रखो संबंधों को

माॅं पिता से बने रक्त संबंध;

जन्म जन्मांतर से है निरंतर 

गुणसूत्र का जीवन अनुबंध।


-अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post