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हिंदी भवन में वरिष्ठ विमर्श संपन्न : नई तकनीक से बहुत हद तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा


 

हिंदी भवन में वरिष्ठ विमर्श संपन्न :  नई तकनीक से बहुत हद तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा

भोपाल। नई तकनीक से भ्रष्टाचार पर बहुत हद तक अंकुश लगा है।  भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आम नागरिक को जागरुक करना होगा।  इस समस्या से निपटने में भारतीय ज्ञान परंपरा अहम भूमिका निभा सकती है।

 इस तरह के विचार शनिवार शाम हिंदी भवन में सुनाई दिए। अवसर था मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की नियमित श्रंखला ‘वरिष्ठ विमर्श’ का। विमर्श में इस बार  ‘जनतंत्र को भ्रष्टाचार मुक्त करने का दायित्व जन पर है’ विषय पर विचार-विनिमय किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी केके सेठी ने की।  समिति के मंत्री संचालक कैलाशचंद्र पंत विशेष रूप से उपस्थित थे।  अध्यक्षीय वक्तव्य में केके सेठी ने  कहा कि तकनीक से भ्रष्टाचार पर बहुत हद तक अंकुुश लगा है, लेकिन इसे पूरी तरह तभी समाप्त किया जा सकेगा जब आम आदमी जागरुक होगा। पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि हमारी ज्ञान परंपरा में जो संस्कार दिये हैं वह इस समस्या से निपटने में सहायक होगी। वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी का कहना था कि भ्रष्टाचार के लिए जन भी कम दोषी नहीं। उन्होंने कुछ अनुभवों के मार्फत बतलाया कि जल्द काम के लालच में कई बार हम ही अधिकारियों के सामने रिश्वत की पेशकश करते हैं।  युवा अधिवक्ता विलक्षण सक्सेना का कहना था कि मोबाइल का युग है। यदि कोई लोक सेवक आपसे किसी तरह की अर्नगल मांग करता है तो आप बातें रिकॉर्ड कर सकते हैं, कोर्ट इसे सबूत मानता है। जीवन बीमा के विजिलेंस अधिकारी उदय सिन्हा ने कहा कि सिर्फ पैसे का लेनदेन भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि नियम तोडऩा भी भ्रष्टाचार का ही रूप है। चर्चा में  क्षमा पांडे, सुनीता शर्मा, अशोक धमेनिया, प्रदीप धु्रव आदि ने विचार रखे। संचालन संयोजक महेश सक्सेना ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

रिपोर्ट दीपक पगारे

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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