काव्य :
हिन्दी से,सब करें न दूरी
(हिंदी दिवस पर)
हिन्दी की चर्चा, आज मैं कर लूं
गोष्ठी कर लूं,पर्चा पढ़ लूं
सरस्वती जी को, कर लूं नमन
क्योंकि ,आज दिवस है हिन्दी का
बोली में ,अंग्रेजी घुस आई
कौन करे ,अब हाथापाई
क्या मैने ही ,लिया है ठेका
फिर क्यों मैं,हिन्दी की,फिकर लूं
कहां कहां का, जिक्र करूं मैं
हिन्दी न है, कई पाठ्यक्रमों में
डिग्रियां विशेष, हिन्दी से हैं दूर
अंग्रेजी में, सब हैं मशहूर
नौकरियों में ,कम है हिन्दी
संसद में यही, चर्चा बस होती
हिन्दी उन्नत कैसे होगी,जब
पाठशालाएं ही अंग्रेजी, बोती
कोई भाषा,देश में, शत्रु न होवे
हिन्दी ,देश की राष्ट्र भाषा होवे
है यही सदा से, सबकी इच्छा
पर हिन्दी चाहे ,जटिल परीक्षा
अंग्रेजी घुस आई ,आचरण में
हिन्दी भी दिखे,वातावरण में
करें प्रयास,होगी आस ये पूरी
ब्रज,करें न सब, हिन्दी से दूरी
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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