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काव्य : मान भी जाओ,आज जाओ ना -सीताराम साहू"निर्मल"छतरपुर म प्र


 काव्य : 

मान भी जाओ,आज जाओ ना

///////////////पूर्णिका///////////

मान भी जाओ,आज जाओ ना।

देखो फिर आज यू सताओ ना। 


मौन होकर चले कहां उठकर, 

बात क्या है ,भला बताओ ना । 


तुमने मेरे लिए लिखे खत जो,

अपने दिल दर्द वह सुनाओ ना। 


मेरे दिल में जो दर्द तुमने दिया,

सह गया अब तो भूलजाओ ना। 


दर्द  सहने की पड़ गई आदत, 

दर्द देने का हक, निभाओ ना।


किस तरह तुमको मनाऊँ साथी,

न समझ आए,कुछ बताओ ना। 


जीत हासिल कभी मुझे न हुयी,

हार दिल तुम,मुझे जिताओ ना । 


बात अब मुझसे कुछ नही बनती,

बात आकर के तुम बनाओ ना । 


एक निर्मल की बात की खातिर, 

क्या कहूं अब तो मान जाओ ना । 


- सीताराम साहू"निर्मल"छतरपुर म प्र

9755492466

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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