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काव्य : उन्हें पूछना जाकर - उपमेंद्र सक्सेना, एडवोकेट, बरेली


 काव्य : 

उन्हें पूछना जाकर

गीत


नई अमीरी की शेखी को

अंटी में धर लाले। 


चाटे तलवे जिनके तूने

उन्हें पूछना जाकर

पुश्तैनी आदर्श डिगे हैं

कब लालच में आकर

लड़े लड़ाई यहाँ मूँछ की 

इज्ज़त के रखवाले। 


जि़ल्लत गले लगाकर तूने

दौलत खूब कमाई

पीड़ा की छाती पर चढ़कर

छल ने धूम मचाई

दिखे नहीं क्यों  निष्ठाओं के 

पड़े पाँव में छाले। 


विलासिताएँ दिखा चुकी हैं

कितने खूनी मंजर

आज लाजवंती सोचों की 

कोख हुई है बंजर

हाय दर्प ने बीज ज़हर के

मन -भीतर बो डाले।


यहाँ न लोभी इच्छाओं के

होंगे पूरे सपने

जा तू धन-बल की माला  को

कहीं और अब जपने

जाने कितने तुझ जैसों से 

पड़े  हमारे पाले।


 - उपमेंद्र सक्सेना, एडवोकेट

' कुमुद- निवास', बरेली

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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