काव्य :
साथी आज मेरे साथ चल
साथी आज मेरे साथ चल,
कल क्या था कल क्या होगा,
इसको मत याद कर।
बीता हुआ पल काँटा था,
आने वाला ख्वाब है,
दोनों के बीच ये लम्हा
सबसे हसीन जवाब है।
साथी आज मेरे साथ चल,
कल क्या था कल क्या होगा
इसको मत याद कर।
दर्द को अलमारी में बंद कर दे,
फिक्र को खिड़की से फेंक दे,
आज धूप भी हमारी है,
आज हवा भी हमारी है।
साथी आज मेरे साथ चल,
कल क्या था कल क्या होगा
इसको मत याद कर।
चल उस पीपल के नीचे बैठें,
चाय की चुस्की में किस्से बुनें,
न कल का हिसाब माँगें,
न कल का वादा ढूंढें।
साथी आज मेरे साथ चल
कल क्या था कल क्या होगा
इसको मत याद कर।
ज़िंदगी ठहरी नहीं है साथी,
वो तो बहती नदी का नाम है,
तू मेरा हाथ थाम ले बस,
यही इस पल का पैग़ाम है।
साथी आज मेरे साथ चल
कल क्या था कल क्या होगा
इसको मत याद कर।
- डॉ सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र
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बहुत बहुत धन्यवाद सोनी जी।
ReplyDeleteआपके जीवन साथी के साथ सुखद संवाद करती सकारात्मक रचना के लिए साधुवाद!
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