वीर शासन जयंती : भगवान महावीर ने आत्मविजय का मार्ग दिखाया - आर्यिका भावनामति
इटारसी। इटारसी नगर में चातुर्मास कर रहीं आर्यिका भावनामति माता ने वीर शासन जयंती पर महावीर भवन में प्रवचन देते हुए कहा कि वीर शब्द सुनते ही हमें एक बात स्मरण आती है कि जैन धर्म में सबसे महान वीर है भगतान महावीर। भगवान महावीर को जब केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई तभी से उनका दिव्य उपदेश प्रारंभ हुआ। उसी दिव्य धर्म प्रवर्तन को वीर शासन कहा जाता है। इसलिए हम गर्व से कहते हैं - जय जय वीर शासन।
उन्होंने कहा, वीर होना केवल बाहरी युद्ध जीतना नहीं है। जैन दर्शन कहता है कि जिसने अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ को जीत लिया वही सच्चा वीर है। भगवान महावीर ने आत्मविजय का मार्ग दिखाया इसलिए उनका शासन वीर शासन कहलाता है। वीर केवल एक नाम नहीं महावीर का स्वरूप है। शासन केवल व्यवस्था नहीं मोक्ष का मार्ग है।
जयंती केवल उत्सव नहीं, उस दिव्य घटना को जीवन में उतारने का संकल्प है। वीर शासन इसलिए महान है क्योंकि यह किसी जाति, वर्ग या देश का शासन नहीं बल्कि आत्मा को संसार से मुक्त कराने वाला धर्मशासन है।
आर्यिका भावनामति ने ये भी कहा आज हमें अपने आपसे पूछना चाहिए क्या हम केवल जय जय वीर शासन बोलते हैं या वीर शासन के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारते हैं। यदि हमारे जीवन में अहिंसा, सत्य, क्षमा, संयम और स्वाध्याय आ जाए तभी वीर शासन जयंती मनाना सार्थक होगा। हम सभी संकल्प लें कि भगवान महावीर स्वामी के बताए हुए मार्ग पर चलेंगे और अपने जीवन को धर्ममय बनाएंगे और वीर शासन की गरिमा को बढ़ाएंगे। इस अवसर पर आर्यिका सदयमति और भक्तिमति भी उपस्थित थीं।
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