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संतोष श्रीवास्तव का कथा-लेखन कौशल वैश्विक स्तर का है



संतोष श्रीवास्तव का कथा-लेखन कौशल वैश्विक स्तर का है

आकार लिटरेरी एंड कल्चरल सोसाइटी ने पुष्पों की महक, शब्दों की ऊष्मा और सुगंधित भावनाओं के साथ संतोष श्रीवास्तव का स्वागत किया

भोपाल। आकार लिटरेरी एंड कल्चरल सोसाइटी, भोपाल द्वारा शनिवार, 1 अगस्त 2026 को सायं 5:00 बजे हिंदी भवन के महादेवी वर्मा सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव की दो पुस्तकों के उर्दू संस्करणों का लोकार्पण एवं उन पर विमर्श आयोजित किया गया।

लोकार्पित पुस्तकों में उपन्यास ‘ख्वाबों के पैरहन’ (हिंदी संयुक्त उपन्यास प्रमिला वर्मा के साथ ‘हवा में बंद मुट्ठियाँ’ का उर्दू अनुवाद), जिसका अनुवाद डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी (प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) ने किया है, तथा कहानी-संग्रह ‘आसमानी आँखों का मौसम’, जिसका उर्दू अनुवाद डॉ. सबीहा रहमानी और डॉ. मोहम्मद अफ़ज़ल (बाँदा, उत्तर प्रदेश) ने किया है, शामिल हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार इक़बाल मसूद ने की। उन्होंने कहा कि संतोष श्रीवास्तव की दो महत्वपूर्ण कृतियों का उर्दू में प्रकाशित होना हिंदी और उर्दू साहित्य के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ‘ख्वाबों के पैरहन’ दो रचनाकारों के संयुक्त सृजन का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह साहित्यिक दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व की कृति है। उन्हें विश्वास है कि इस उपन्यास को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिलेगी। क्योंकि संतोष श्रीवास्तव का कथा-लेखन कौशल वैश्विक स्तर का है।

मुख्य वक्ता के रूप में मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. डॉ. मोहम्मद अहसन ने उपन्यास ‘ख्वाबों के पैरहन’ की समीक्षा करते हुए कहा कि यह पाठक से निरंतर संवाद करने वाला सशक्त उपन्यास है। उन्होंने कहा कि संतोष श्रीवास्तव और डॉ. प्रमिला वर्मा ने मुस्लिम समाज की पृष्ठभूमि को अत्यंत संवेदनशीलता और प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है। उपन्यास की भाषा, चरित्र-चित्रण और संवाद जीवन के यथार्थ को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करते हैं।

प्रख्यात उर्दू समीक्षक मेहमूद मलिक ने कहा कि ‘ख्वाबों के पैरहन’ हिंदी के दो प्रतिष्ठित उपन्यासकारों—संतोष श्रीवास्तव और डॉ. प्रमिला वर्मा—का संयुक्त उपन्यास है। उन्होंने कहा कि दो लेखकों द्वारा एक साथ उपन्यास लिखना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, किंतु दोनों रचनाकारों ने इसे इतनी सहजता से निभाया है कि कहीं भी कथानक का प्रवाह बाधित नहीं होता। उन्होंने कहा कि उपन्यास एक गरीब मुस्लिम परिवार के माध्यम से पूरे मुस्लिम समाज की संस्कृति, परंपराओं, रहन-सहन और जीवन-संघर्ष का अत्यंत संवेदनशील चित्र प्रस्तुत करता है।

उपन्यास के हिंदी संस्करण ‘हवा में बंद मुट्ठियाँ’ की समीक्षा करते हुए डॉ. नीलिमा रंजन ने कहा कि संतोष श्रीवास्तव और डॉ. प्रमिला वर्मा का यह संयुक्त उपन्यास हिंदी साहित्य में एक अभिनव प्रयोग है। दोनों लेखकों का रचनात्मक सामंजस्य इतना स्वाभाविक है कि पाठक यह पहचान नहीं पाता कि कौन-सा अध्याय किस लेखक ने लिखा है। उन्होंने कहा कि उपन्यास का शीर्षक भी अपने भीतर अनेक अर्थ समेटे हुए है और इसकी केंद्रीय पात्र रेहाना पूरे कथानक की आत्मा है।

कहानी-संग्रह ‘आसमानी आँखों का मौसम’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध शायर बद्र वास्ती ने कहा कि संपादन के दौरान उन्हें प्रत्येक कहानी कई बार पढ़ने का अवसर मिला और इन कहानियों के पात्रों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि संग्रह की प्रत्येक कहानी अलग कथ्य और संवेदना लिए हुए है। भाषा अत्यंत सहज है तथा प्रकृति-चित्रण विशेष रूप से आकर्षित करता है। उन्होंने डॉ. सबीहा रहमानी के अनुवाद-कार्य की सराहना करते हुए कहा कि अब यह उत्कृष्ट कहानी-संग्रह उर्दू पाठकों तक भी पहुँचेगा।

अनुवादक डॉ. सबीहा रहमानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संतोष श्रीवास्तव की कहानियाँ पढ़ने के बाद उन्हें लगा कि इनका उर्दू में आना आवश्यक है, क्योंकि इनमें हमारी साझा गंगा-जमुनी संस्कृति का सुंदर चित्रण है। इसी प्रेरणा से उन्होंने इन कहानियों का अनुवाद आरंभ किया। उन्होंने बताया कि पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपना कार्य पूरा किया और यह पुस्तक अब उर्दू पाठकों को समर्पित है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी ने 31 जुलाई को मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा कार्यक्रम को उनकी स्मृति को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी रचना का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं होता, बल्कि वह दो भाषाओं, दो संस्कृतियों और दो समाजों के बीच संवेदनाओं, अनुभवों और मानवीय मूल्यों का सेतु बनाता है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में आसिम हुसैन फ़ारूक़ी ने सभी अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया, जबकि अंत में सूफ़िया ख़ान ने सभी का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर भोपाल के हिंदी एवं उर्दू साहित्य-जगत के अनेक वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

प्रस्तुतकर्ता
मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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