कबीरधाम सागर में संत महंतों के आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर में हुआ कवि सम्मेलन
सागर। सागर के कबीर धाम राजघाट रोड, सागर में संचालित पंच दिवसीय संत-महंतों के आवसीय आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर के मध्य कबीर दर्शनाचार्य महंत श्री रामजीवन शास्त्री ‘साहेब’ के सानिध्य में वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य पं. महेश दत्त त्रिपाठी के संयोजन में विराट कवि सम्मेलन सद्गुरु कबीर की बंदना “वंदन है गुरु नाम को जो श्रुति पुराण को सार बंधु संत समाज को जो सत्य रूप साकार” महंत बद्री गौर जी के द्वारा प्रारंभ हुई। सरस्वती वंदना पूरन सिंह राजपूत ने हे मात सरस्वती वर देना तथा पर्युषण पर्व पर जिन वंदना डॉक्टर नलिन निर्मल ने प्रस्तुत की। संत अर्जुन दास साहब ने जीव दया आत्मा पूजा सद्गुरु भक्ति और नहीं दूजा भक्ति की महिमा बताते हुए चैतन्य आत्मज्ञानी गुरु की भक्ति पर जोर दिया। पूरन सिंह राजपूत ने रुक्मणी मिलन राधिका आयी फूली नहीं समाई कृष्ण रुक्मणी मिलन पर छंद सुनाएं। प्रगतिशील लेखक संघ के साहित्यकार पी आर मलैया ने धर्म तो मार्ग है सर्व कल्याण का जुड़ा है साथ में आत्म कल्याण भी रचना सुनाई अखिल भारतीय साहित्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य पंडित महेश त्रिपाठी ने कबीर साहेब की वाणी के परिशीलन की आवश्यकता, परम तत्व का परिचय, सत्यलोक सत्य पुरुष सद्गुरु पर केंद्रित रचना सबके हृदय में विराजमान है वे परमात्मा समष्टि रूप निर्मल चेतन सत्य पुरुष जिनका स्वरूप ही सत्यलोक है साथी त्रिपाठी जी ने विदुरागिनी के श्री कृष्ण के अनन्य प्रेम का छंद सो प्रभु मोर बाकी बनी केर के पताहू प्रेम से पाय सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया। ललित निर्मल ने चिराग प्रेम का राधा ने यूं जलाया है सूर मीरा तक इसका प्रकाश आया है अभय सिंह ने उठो विद्यार्थी जाग जाओ, महंत लक्ष्मण दास ने व्यंग्य रचना कहने को तो शासक है पर पशुओं जैसे लड़ते हैं आनंद मिश्रा अकेला ने दुनिया कैसी बावरी मंदिर मस्जिद जाए, वृंदावन राय सरल ने रास्ता है कांटों भरा हम हैं नंगे पांव सुनाई, महंत डॉ राम जीवन शास्त्री ने कवियों को कबीर दर्शन डायरी, पेन, प्रसाद देकर सम्मानित किया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष इंजीनियर एस आर सिंह ने नित्य कर्म पूजा प्रकाश ग्रंथ भेट कर कवियों का आभार माना है इस अवसर पर राजस्थान महाराष्ट्र गुजरात उत्तर प्रदेश दिल्ली मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के संत महंत उपस्थित रहे।
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