काव्य :
बेटियां
बेटियां तो मन की अनमोल भावनाएं हैं,
दीपक की वर्तिका सी, उजियाला बांटती,
रुठ्तीं,मनातीं ,रिश्तों की बांह गहे,
सपनों में खोई अनूठी कल्पनाएँ हैं.
मन की उदासी में खुशियों के पल जैसी
अंतस में गीतों सी, मधुर सर्जनाएं हैं
अंगना बुहारती, रंगोली सजाती वो.
माँ के सपनो के संगछाया सी डोलतीं,
आँचल की छाँह तले,उर्वरा-बसुन्धरा सी,
गंध, सुरभि बिखरती,मन की कलिकाएँ हैं.
सीता सी निर्मलता,राधा सी कोमलता,
शक्ति- स्वरूपा बन सृष्टि की हैं सार्थकता,
प्रेम की उपासना में,मौन प्रार्थनाएं हैं.
पावनता गंगा की,हिमगिरि सी है दृढ़ता
जगमग दीवाली सी, दीपित है सुन्दरता,
जीवन की नदिया में रंगों की धार लिए,
बोती बीज प्यार के, वो अद्भुत कृशकाएं हैं,
बेटियां तो मन की अनमोल भावनाएं हैं
हिय-अंतर बरसती हैं,बारिश के बूंदों सी
ममता के मंदिर में,ज्योति की शिखाएं हैं ,
तुलसी के बिरवे सी रिश्तों को सींचती,
अभिमंत्रित गीतों में वेद की ऋचाएं हैं.
बेटियां तो मन क़ि अनमोल भावनाएं हैं.
---पद्मा मिश्रा , जमशेदपुर
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