ad

काव्य की चौपाल में बिखरे शब्दों के रंग, देर तक झूमे कविताओं के संग


काव्य की चौपाल में बिखरे शब्दों के रंग, देर तक झूमे  कविताओं के संग

 भोपाल।  अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के तत्वावधान में  ‘काव्य की चौपाल’ का सुंदर एवं आत्मीय आयोजन साहित्यप्रेमी वंदना रानी दयाल जी के निवास स्थान पर किया गया। साहित्य, संवेदना और सृजन से सराबोर इस काव्य संध्या में कवियों ने अपनी रचनाओं के विविध रंगों से ऐसा समाँ बाँधा कि देर तक कविता की गूँज वातावरण में बनी रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार  नीरज त्यागी जी ने की। अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की महासचिव अर्चना पांडे जी की  महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा  सरस्वती माँ के चित्र पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ साथ ही  स्नेहलता पांडे जी ने सरस्वती वंदना की  प्रस्तुति दी। इसके पश्चात् वंदना रानी जी ने अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के उद्देश्य एवं साहित्यिक गतिविधियों का संक्षिप्त एवं प्रभावपूर्ण परिचय प्रस्तुत करते हुए उपस्थित सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
काव्य-चौपाल में मंच से एक के बाद एक कविता, गीत, दोहे और मुक्तकों की ऐसी मनोहारी प्रस्तुतियाँ हुईं कि श्रोता काव्य-रस में डूबते चले गए। अर्चना पाडंया, शारदा मिश्रा, पुष्पा सिन्हा, अंजू अग्रवाल ' उत्साही ' वनिता शर्मा, चंचल वशिष्ठ, स्नेहलता पांडे, सीमा पुरबा ,वंदना रानी दयाल तथा डॉ. भावना शुक्ल  ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से भाव, संवेदना, प्रेम, जीवन और समाज के विविध पक्षों को अभिव्यक्ति दी। प्रत्येक रचनाकार की प्रस्तुति का अपना अलग रंग और अपना अलग अंदाज रहा।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन डॉ. भावना शुक्ल  ने किया। उन्होंने अपनी सधी हुई शैली से कार्यक्रम को क्रमबद्धता प्रदान करते हुए रचनाकारों और श्रोताओं के बीच सुंदर संवाद बनाए रखा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष  वरिष्ठ साहित्यकार नीरज त्यागी जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने रचनाओं के भाव-पक्ष और अभिव्यक्ति की विशेषताओं पर सारगर्भित टिप्पणी करते हुए कवियों का उत्साहवर्धन किया। विशेष रूप से चेहरे और आँखों पर प्रस्तुत उनकी सुंदर रचना ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और खूब सराहना प्राप्त की।
पूरी काव्य चौपाल में आत्मीयता, अपनापन और साहित्यिक सौहार्द का वातावरण बना रहा। ऐसा लगा मानो कविता केवल मंच पर पढ़ी नहीं जा रही, बल्कि उपस्थित हर हृदय से संवाद कर रही हो। विभिन्न विधाओं की रचनाओं ने कार्यक्रम को विविधता प्रदान की और साहित्यप्रेमियों को भावनाओं के अनेक रंगों से परिचित कराया।
कार्यक्रम के अंत में वंदना रानी जी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस आत्मीय साहित्यिक मिलन को सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद किया।
इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की ‘काव्य की चौपाल’ केवल एक काव्य-पाठ कार्यक्रम न रहकर साहित्यिक आत्मीयता, रचनात्मक संवाद और मैत्रीभाव का सुंदर उत्सव बन गई-जहाँ शब्दों ने दिलों को जोड़ा और कविता ने शाम को यादगार बना दिया। सभी को उपहार स्वरूप तुलसी जी का पौधा भेंट देकर यह संदेश दिया गया कि हर घर में  खुशहाली रहे।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post