पर्यूषण महापर्व के पहले दिन हुई उत्तम क्षमा धर्म की आराधना
वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में दशलक्षण महामंडल विधान का हुआ शुभारम्भ
ललितपुर। सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित तालबेहट के दोनों जैन मंदिरों में बुधवार को पर्यूषण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गयी। भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक चलने वाले इस दस दिवसीय महापर्व में जैन श्रावकों की आत्मशुद्धि के लिए धर्म-साधना हेतु विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये। कसबे के पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पं. संतोष कुमार जैन शास्त्री अमृत के निर्देशन में अभिषेक-शांतिधारा, पूजन-विधान का आयोजन किया गया। संतोष शास्त्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा दशलक्षण धर्म का पहला दिन उत्तम क्षमा का होता है जो हमें क्रोध से बचने का संदेश देता है। क्रोध आत्मिक उन्नति में बाधक एवं मनुष्य के पतन का कारण बनता है। इसके रहते हमें कभी आत्मा का बोध नहीं हो सकता। वहीं वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारिणी मानी दीदी झाँसी के निर्देशन में अभिषेक-शांतिधारा की क्रियाएँ संपन्न की गयी। जिसमें सीए मोहित जैन दिल्ली, विकास भंडारी, अशोक जैन, पुष्पेंद्र विरधा, हितेंद्र पवैया, अंजेश गुन्देरा ने प्रमुख भूमिका निभाई। नित्यमय पूजन एवं भक्तामर महामंडल विधान के उपरांत दशलक्षण महामंडल विधान का शुभारम्भ किया। ध्वजारोहण रोहित रजत जैन बबीना ने किया। मंडप पर मंगल कलश की स्थापना प्रियंका, सोनम, राखी, अमृता एवं आभा जैन अखंड ज्योति की स्थापना अलका, नीतू, स्वाति, आकांक्षा जैन, जिनवाणी की स्थापना विभा जैन ने की। दोपहर की बेला में तत्वार्थ सूत्र का स्वाध्याय किया। मानी दीदी ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा क्रोध को जीतना सबसे बड़ा धर्म है जिसे उत्तम क्षमा कहते हैं। यह कहने और सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन क्षमा को स्वीकार करना बहुत कठिन है जो जीवन के मार्ग को सुगम बना देता है। इन दिनों श्रावकों में संयम को धारण कर तप-त्याग के साथ व्रत उपवास एवं एकासन करने की विशेष परम्परा है। सायं काल की बेला में सामूहिक आरती, णमोकार महामंत्र का पाठ एवं शास्त्र प्रवचन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। जिसमें सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन विशाल जैन पवा ने किया। आभार व्यक्त अनिल जैन ने किया।
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