रामलीला मैदान की अस्थायी दुकानों के टेंडर पर बवाल, छोटे व्यापारियों के समर्थन में धरने पर बैठे प्रमोद पगारे
नगरपालिका के फैसले को निरस्त करने की मांग, कहा—500-1000 रुपये रोज कमाने वालों पर 3 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे सहेंगे छोटे दुकानदार
इटारसी। नवरात्रि और रामलीला आयोजन के दौरान रामलीला मैदान एवं पुरानी इटारसी के वीर सावरकर मैदान में अस्थायी दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। नगरपालिका द्वारा अस्थायी दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष, नर्मदापुरम पत्रकार संघ प्रमोद पगारे ने एसडीएम इटारसी को पत्र सौंपकर प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है। इसी मांग को लेकर वे जयस्तंभ चौक पर धरने पर भी बैठे हैं।
पगारे ने अपने पत्र में बताया कि नगरपालिका द्वारा 29 सितंबर 2026 को प्रकाशित विज्ञापन के माध्यम से रामलीला समारोह के लिए रामलीला मैदान एवं वीर सावरकर मैदान में अस्थायी दुकानों के आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पत्र के अनुसार, दुकानों का न्यूनतम आवंटन शुल्क 3 हजार रुपये प्रति दुकान रखा गया है और करीब 9-10 दिनों के लिए दुकानें आवंटित की जानी हैं।
‘छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा असर’
धरने पर बैठे पगारे का कहना है कि रामलीला मेले में बड़ी संख्या में ऐसे छोटे दुकानदार आते हैं, जो फुलकी, मूंगफली, गुब्बारे, कॉटन कैंडी, छोटे खिलौने सहित अन्य छोटे सामान बेचकर अपना परिवार चलाते हैं। पत्र में दावा किया गया है कि इन छोटे कारोबारियों की रोजाना की कमाई लगभग 500 से 1000 रुपये तक होती है। ऐसे में 10 दिन के लिए दुकान आवंटन पर 3 हजार रुपये का शुल्क छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। पगारे ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नगरपालिका के इस निर्णय को निरस्त किया जाए।
धरने को मिला समर्थन
जयस्तंभ चौक पर शुरू हुए धरने में छोटे व्यापारियों की समस्या को लेकर लोगों का समर्थन भी देखने को मिला। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि रामलीला और नवरात्रि जैसे आयोजनों में वर्षों से छोटे कारोबारी अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं। ऐसे में आवंटन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे इन छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। इस दौरान विधायक प्रतिनिधि जगदीश मालवीय, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवाकांत गुड्डन पांडेय, नगर कांग्रेस अध्यक्ष कन्हैया गोस्वामी, ओम सेन, गुड्डू गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी मनीष ठाकुर, अनिल मिहानी, सुधांशु मिश्र, रोहित नागे, कृष्णा राजपूत, अरविंद शर्मा, राहुल शरण, कुशल नवथले, देवेंद्र तिलोटिया, सुरेंद्र राजपूत, सर्व ब्राह्मण समाज जिलाध्यक्ष जितेंद्र ओझा, विवेक मालवीय, आशुतोष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, विनोद कुशवाह, मनोज बडकुर, विनीत चौकसे, लखन बेस, महेश आर्य, प्रवीण गांधी, राजेश गुप्ता, संतोष गुरयानी, दिव्यांग बाबा साहब सहित अन्य बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, राजनैतिक संगठन पदाधिकारी, व्यापारी एवं पत्रकार सहित नागरिकों ने समर्थन दिया एवं जयस्तंभ पर संबोधित किया।
मामले में पत्रकार पगारे ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि नगरपालिका द्वारा अस्थायी दुकानों के आवंटन संबंधी निर्णय निरस्त नहीं किया जाता है, तो छोटे व्यापारियों के पक्ष में आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
42 साल की पत्रकारिता और 17 साल की रामलीला समिति से जुड़े होने का हवाला
पगारे ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वे करीब 42 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हैं और लगभग 17 वर्षों तक रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि इटारसी में करीब 200 वर्षों से रामलीला का आयोजन होता आ रहा है और इससे जुड़े छोटे कारोबारी लंबे समय से अपनी रोजी-रोटी चलाते रहे हैं। मामले में अब नजर प्रशासन के अगले कदम पर है—क्या नगरपालिका छोटे दुकानदारों के हित में टेंडर प्रक्रिया पर पुनर्विचार करेगी या फिर धरना आगे किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगा?
नगरपालिका के फैसले को निरस्त करने की मांग, कहा—500-1000 रुपये रोज कमाने वालों पर 3 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे सहेंगे छोटे दुकानदार
इटारसी। नवरात्रि और रामलीला आयोजन के दौरान रामलीला मैदान एवं पुरानी इटारसी के वीर सावरकर मैदान में अस्थायी दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। नगरपालिका द्वारा अस्थायी दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष, नर्मदापुरम पत्रकार संघ प्रमोद पगारे ने एसडीएम इटारसी को पत्र सौंपकर प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है। इसी मांग को लेकर वे जयस्तंभ चौक पर धरने पर भी बैठे हैं।
पगारे ने अपने पत्र में बताया कि नगरपालिका द्वारा 29 सितंबर 2026 को प्रकाशित विज्ञापन के माध्यम से रामलीला समारोह के लिए रामलीला मैदान एवं वीर सावरकर मैदान में अस्थायी दुकानों के आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पत्र के अनुसार, दुकानों का न्यूनतम आवंटन शुल्क 3 हजार रुपये प्रति दुकान रखा गया है और करीब 9-10 दिनों के लिए दुकानें आवंटित की जानी हैं।
‘छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा असर’
धरने पर बैठे पगारे का कहना है कि रामलीला मेले में बड़ी संख्या में ऐसे छोटे दुकानदार आते हैं, जो फुलकी, मूंगफली, गुब्बारे, कॉटन कैंडी, छोटे खिलौने सहित अन्य छोटे सामान बेचकर अपना परिवार चलाते हैं। पत्र में दावा किया गया है कि इन छोटे कारोबारियों की रोजाना की कमाई लगभग 500 से 1000 रुपये तक होती है। ऐसे में 10 दिन के लिए दुकान आवंटन पर 3 हजार रुपये का शुल्क छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। पगारे ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नगरपालिका के इस निर्णय को निरस्त किया जाए।
धरने को मिला समर्थन
जयस्तंभ चौक पर शुरू हुए धरने में छोटे व्यापारियों की समस्या को लेकर लोगों का समर्थन भी देखने को मिला। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि रामलीला और नवरात्रि जैसे आयोजनों में वर्षों से छोटे कारोबारी अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं। ऐसे में आवंटन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे इन छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। इस दौरान विधायक प्रतिनिधि जगदीश मालवीय, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवाकांत गुड्डन पांडेय, नगर कांग्रेस अध्यक्ष कन्हैया गोस्वामी, ओम सेन, गुड्डू गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी मनीष ठाकुर, अनिल मिहानी, सुधांशु मिश्र, रोहित नागे, कृष्णा राजपूत, अरविंद शर्मा, राहुल शरण, कुशल नवथले, देवेंद्र तिलोटिया, सुरेंद्र राजपूत, सर्व ब्राह्मण समाज जिलाध्यक्ष जितेंद्र ओझा, विवेक मालवीय, आशुतोष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, विनोद कुशवाह, मनोज बडकुर, विनीत चौकसे, लखन बेस, महेश आर्य, प्रवीण गांधी, राजेश गुप्ता, संतोष गुरयानी, दिव्यांग बाबा साहब सहित अन्य बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, राजनैतिक संगठन पदाधिकारी, व्यापारी एवं पत्रकार सहित नागरिकों ने समर्थन दिया एवं जयस्तंभ पर संबोधित किया।
मामले में पत्रकार पगारे ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि नगरपालिका द्वारा अस्थायी दुकानों के आवंटन संबंधी निर्णय निरस्त नहीं किया जाता है, तो छोटे व्यापारियों के पक्ष में आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
42 साल की पत्रकारिता और 17 साल की रामलीला समिति से जुड़े होने का हवाला
पगारे ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वे करीब 42 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हैं और लगभग 17 वर्षों तक रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि इटारसी में करीब 200 वर्षों से रामलीला का आयोजन होता आ रहा है और इससे जुड़े छोटे कारोबारी लंबे समय से अपनी रोजी-रोटी चलाते रहे हैं। मामले में अब नजर प्रशासन के अगले कदम पर है—क्या नगरपालिका छोटे दुकानदारों के हित में टेंडर प्रक्रिया पर पुनर्विचार करेगी या फिर धरना आगे किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगा?
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