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काव्य : तर्पण - शकुन शेंडे संघर्ष ,बचेली


काव्य : 

तर्पण

छत्तीस गुणसूत्र से देह धरी,
न उऋण होगी काया कण-कण।
तुम्हारे ममत्व स्नेह  छाया में,
सर्वस्व हे मात-पिता अर्पण!!

तुमसे न रहूं मैं विलग कभी,
 हो भोगवाद में लख आकर्षण।
सुख दुख सह तुम संग कुंदन बनूं,
करूं तुम्हरे चरण तप संघर्षण!!

तुम अपने वरद हस्त से मुझको,
सदा आप्लावित करते रहते।
नही भेद सुत-सुता में किंचित-
करते हो सदैव सम स्नेह वर्षण!!

प्राचीन- अर्वाचीन कोटि जन्म,
वात्सल्यावृत्त रही, रहूं आवृत्त।
उस धवल आँचल में रहे उंगली- 
तुम अर्थ धर्म काम मोक्ष दर्पण!!

भीतर की शमन कुरीतियां कर,
क्यूं न मना लूं यहीं पर्व पर्यूषण।
तुम्हे इसी जन्म करूं तृप्त तात!
मरणोपरान्त करूं क्या तर्पण!!

- शकुन शेंडे संघर्ष
बचेली छ0ग0
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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