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जनकपुर में गूंजा जयघोष: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, माता सीता ने पहनाई वरमाला


 

जनकपुर में गूंजा जयघोष: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, माता सीता ने पहनाई वरमाला

श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का चतुर्थ दिवस

इटारसी। संपूर्ण नर्मदांचल की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर परिसर तुलसी चौक में 63वे वर्ष में श्री रामजन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। इस वर्ष श्रीमद प्रयागपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज बाल्मीकि एवं तुलसीदासकृत रामायण पर प्रवचन दे रहे हैं।

चतुर्थ दिवस की कथा में व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि मिथिला नरेश राजा जनक की नगरी आज एक ऐतिहासिक और अलौकिक उत्सव की साक्षी बनी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने भगवान शिव के प्राचीन 'पिनाक' धनुष को खंडित कर न केवल स्वयंवर की शर्त पूरी की, बल्कि जगत जननी माता सीता के वरण का मार्ग भी प्रशस्त किया। इस दृश्य को देख आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की और पूरी मिथिला नगरी 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी।

​महाराज जनक द्वारा आयोजित इस स्वयंवर में भाग लेने के लिए सुदूर प्रांतों से पराक्रमी राजा और राजकुमार पधारे थे। शर्त अत्यंत कठिन थी—भगवान शिव के भारी-भरकम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना। एक-एक कर सभी राजाओं ने प्रयास किया, यहाँ तक कि कई बलशाली योद्धा मिलकर भी धनुष को हिला तक न सके। राजा जनक को निराश देख महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्री राम मंच से उतरे। ​जैसे ही सुकोमल शरीर वाले श्री राम ने धनुष की ओर कदम बढ़ाए, सभा में सन्नाटा पसर गया। श्री राम ने अत्यंत सहजता से धनुष को उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, वज्रपात जैसी भीषण ध्वनि के साथ धनुष बीच से दो टुकड़ों में टूट गया। धनुष टूटते ही जनकपुर के नर-नारियों का हर्ष का ठिकाना न रहा।

महाराज श्री ने कहा कि ​धनुष खंडन के पश्चात सखियों संग माता सीता हाथ में जयमाला लेकर मंद गति से श्री राम के समीप पहुँचीं। उन्होंने लज्जा और श्रद्धा के साथ प्रभु के गले में वरमाला डाल दी। यह दृश्य देख राजा जनक भावुक हो उठे और उन्होंने इसे अपनी प्रतिज्ञा की पूर्णता के साथ-साथ दो महान राज्यों (अयोध्या और मिथिला) के मिलन का आधार बताया। श्रीराम के साथ ही श्री लक्ष्मण जी, श्री भरत जी एवं श्री शत्रुघ्न जी का भी विवाह सम्पन्न हुआ।

आयोजन समिति के प्रवक्ता भूपेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एवं संरक्षक प्रमोद पगारे पत्रकार के मार्गदर्शन में श्री द्वारकाधीश मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री का स्वागत एवं पूजन समिति के अध्यक्ष नीरज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक, उपाध्यक्ष विष्णु शंकर पांडे, सचिव अभिषेक तिवारी, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र दुबे, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सहकोषाध्यक्ष अमित सेठ, देवेंद्र पटेल, एमएल गौर, दिनेश सैनी , एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इटारसी से डॉ आर दयाल, डॉ के सी साहू, डॉ विवेक चरण दुबे, डॉ आभा दुबे, डॉ सुनील देवानी, डॉ विकास जेतपुरिया सहित अन्य चिकित्सकगण सहित माहेश्वरी समाज, खंडेलवाल समाज, महाराष्ट्रीयन समाज, श्री वैश्य समाज इटारसी एवं अन्य अतिथियों   सहित समिति पदाधिकारियों ने महाराज श्री का व्यासपीठ पर पूजन एवं स्वागत किया। 

प्रवचन में हारमोनियम पर दिलीप जी, तबले पर दीपक दुबे, बैंजो पर श्रीराम जी, सहित संकटा प्रसाद मिश्र, दुर्गादत्त तिवारी एवं राहुल जी ने भजनों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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