उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स’ - डॉ. प्रियंका सौरभ ,हिसार
उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स ’ - डॉ. प्रियंका सौरभ ,हिसार भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्…
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उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स ’ - डॉ. प्रियंका सौरभ ,हिसार भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्…
आपने जनगणना का मकान का स्व विवरण भरा ? यह सरल है! - विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल डिजिटल युग में जब मनुष्…
काव्य : त्यौहार ? ये वही दिन होता है न जिस दिन स्त्रियाँ कठिन परीक्षा देती हैं ? जरी वाली साड़ियाँ , भारी भ…
काव्य : मजदूर चाहता है दो प्रेम के मीठे से बोल डाल दे थके बदन में जान, ये मजदूर चाहता है तुमसे बस थोड़ा …
गोस्वामी समाज गौरव अलंकरण से सम्मानित हुईं युवा लेखिका डॉ. शिखा गोस्वामी रायपुर। शहीद स्मारक भवन रायपुर छ…
लघु कहानी : माँ का दिल आँगन में अजीब सा सन्नाटा पसरा था। जैसे दीवारें भी कड़वी आवाज़ों को समेटकर चुप ह…
काव्य : पगडंडी और सड़क पगडंडी को सड़क बनते देखा है, सड़क को पगडंडी भी बनते देखा है। जिस दिन कोई महान गु…
काव्य : स्वर्णिम पत्तों की पाजेब टूटकर डाली से स्वर्णिम पत्र यूं उड़ने लगे, जैसे कवि के गीत के पन्ने बिख…
तपता भारत और जलवायु परिवर्तन की भीषण पदचाप — विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल भारत इस समय जिस प्रचंड ग्रीष्म…
बदलाव के इस दौर में भारत ने सिर्फ समझौता नहीं, संबंध रचे [दुनिया के बदलते आर्थिक अध्याय में भारत का नया शीर…