लघुकथा : उरयोग - डॉ.सत्येंद्र सिंह , पुणे
लघुकथा : उरयोग जबसे बच्चे अलग रहने लगे हैं तबसे वह बदल गई है। किसी से कोई शिकायत नहीं कर…
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लघुकथा : उरयोग जबसे बच्चे अलग रहने लगे हैं तबसे वह बदल गई है। किसी से कोई शिकायत नहीं कर…
आलेख : कृत्रिम बुद्धि और रचनात्मक लेखन — विवेक रंजन श्रीवास्तव (वरिष्ठ आलोचक, व्यंग्यकार एवं मानद हिंदी …
काव्य : अनमोल उपहार बेटियां बाबुल के दिल का अरमान होती हैं बेटियां, घर की रौनक, आंगन की मुस्कान होती हैं बे…
काव्य : अघट घट वह घट-घट के घट-घट में है, उसमें ही घट-घट है। उसी अघट घट की सन्निधि में प्लावित सभी घड़े है…
लघुकथा : हिसाब घुमंतू उस दिन फिर उसी घर के सामने ठिठक गया। कभी इस आँगन में कोकिला की तेज़ आवाज़ गूंजती…
सरोकार : शिक्षा विभाग के प्रयोगों ने बच्चों को कर दिया है शिक्षा से दूर - डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन …
ममता का किला ढहा, भगवा लहर का उदय : बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, राजनीतिक मायने और विपक्ष का संकट …
पुणे का कलंक: समाज की संवेदनहीनता का सबसे काला अध्याय [जब सुरक्षा केवल वादा रह जाए और डर स्थायी सच्चाई बन ज…
भारतीय जैन मिलन का 61वाँ स्थापना दिवस अनाथ आश्रम में मनाया मदर टेरेसा अनाथ आश्रम में दिव्यांग बच्चियों के प…
बारात, संस्कार और बदलता समाज — डॉ. प्रियंका सौरभ , हिसार एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का…