सरोकार : छात्रों की आत्महत्या से उपजे सवाल ,माता-पिता और शिक्षक संवेदनशीलता से लें काम - डाॅ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
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एक कैंटीन से उठा सवाल: व्यवस्था का सच आखिर कहाँ है? [साफ दिखने की कोशिश और सच में साफ होने के बीच…
जनपक्षधरता की मुखर अभिव्यक्ति है पत्रकारिता - पद्मा मिश्रा ,जमशेदपुर समाज के विस्तृत …
संस्कृत के शाश्वत ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने उनके हिंदी , अंग्रेजी अनुवाद आवश्यक हैं — विवेक रंजन श्रीवास्…
आलेख : पिता का गुस्सा : अनुशासन, चिंता या अनकहा प्रेम? *क्रोध तब तक अनुशासन का माध्यम है, जब तक व…
सुविधाएँ बढ़ीं, बजट बढ़ा, फिर भी व्यवस्था वहीं क्यों? [ हाजिरी पूरी, कुर्सियाँ भरी — मगर जिम्मेदा…
भारतीय जनजीवन के अमर चितेरे मुंशी प्रेमचंद 31 जुलाई 1880 में वाराणसी के लमही गाँव में…
स्तूप ने साबित कर दिया — असली शक्ति शस्त्रों में नहीं, संस्कृति में है [यूनेस्को में सारनाथ: भारत…
पद्मविभूषण महामंडलेश्वर जगदगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी गिरि महाराज ग…
गुरु पूर्णिमापर विशेष आलेख : गुरु पूर्णिमा: गुरु का आशीर्वाद, जीवन की सबसे बड़ी पूँजी एक वृद्ध शि…
जल संरक्षण अब सिर्फ परियोजना नहीं, राष्ट्रीय संस्कार बनना चाहिए [वर्षा की हर बूंद को धरती तक पहुँ…
व्यंग्य : जंतर-मंतर : रीलों की क्रांति - विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल दिल्ली का जंतर-मंतर कभी …
आलेख : जेन जी, जेन अल्फ़ा और अब जेन बीटा , पीढ़ियों के नए संक्षिप्त नाम - विवेक रंजन श्रीवास्तव ,…
सरोकार : उज्जैन के वरिष्ठ नागरिक द्वारा रेलवे की पार्किंग बचाने की पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री और …
तिरस्कार से तख्त तक: ‘कीड़ों’ ने सत्ता नहीं, सोच को चुनौती दी [ह्यूमर का हथियार, हंगर की आग और हि…