आलेख :
जेन जी, जेन अल्फ़ा और अब जेन बीटा , पीढ़ियों के नए संक्षिप्त नाम
- विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल
समय केवल कैलेंडर नहीं बदलता, वह मनुष्य की सोच, जीवन शैली और सामाजिक व्यवहार भी बदल देता है। इसी परिवर्तन को समझने के लिए समाजशास्त्रियों और जनसांख्यिकीय अध्येताओं ने विभिन्न आयु वर्गों को अलग अलग पीढ़ियों में एकीकृत संबोधन के रूप में वर्गीकृत किया है। इन्हें संक्षिप्त रूप में जेन एक्स, मिलेनियल, जेन जी, जेन अल्फ़ा और अब जेन बीटा जैसे नामों से जाना जाता है। ये केवल आयु का नहीं, बल्कि उस सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश का संकेत हैं जिसमें कोई पीढ़ी विकसित हुई।
लगभग 1965 से 1980 के बीच जन्मे लोग जेन एक्स कहलाते हैं। यह पीढ़ी परंपरागत जीवन से आधुनिक तकनीकी युग तक के संक्रमण की साक्षी रही।
1981 से 1996 के बीच जन्मे मिलेनियल या जेन वाई ने इंटरनेट, मोबाइल संचार और वैश्वीकरण को अपनाकर नई कार्य संस्कृति को आकार दिया।
1997 से 2012 के बीच जन्मी जेन जी पहली वास्तविक डिजिटल पीढ़ी मानी जाती है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इनके दैनिक जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं। सूचना तक त्वरित पहुंच, वैश्विक दृष्टिकोण और तकनीक के सहज उपयोग ने इस पीढ़ी की पहचान निर्मित की है।
2013 के बाद जन्मे बच्चों को जेन अल्फ़ा कहा जाता है। यह पीढ़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्ट उपकरणों, आभासी दुनिया और स्वचालित प्रणालियों के बीच बड़ी हो रही है।
इसके बाद 2025 से जन्म लेने वाले बच्चों के लिए जेन बीटा शब्द प्रचलन में आ रहा है, जिनके जीवन में एआई, रोबोटिक्स और स्मार्ट परिवेश और भी गहराई से समाहित होंगे।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इन पीढ़ियों की समय सीमाओं में विभिन्न शोध संस्थानों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए इन्हें कठोर मानक नहीं, बल्कि सामाजिक अध्ययन के उपयोगी संकेतक मात्र माना जाता है।
आज जेन जी या जेन अल्फ़ा जैसे शब्द केवल फैशनेबल संबोधन नहीं हैं। ये उस युग की पहचान हैं जिसमें कोई पीढ़ी पली बढ़ी, उसने तकनीक को किस रूप में अपनाया और समाज को किस दिशा में प्रभावित किया। वस्तुतः पीढ़ियों के ये संक्षिप्त नाम बदलते समय का सामाजिक इतिहास हैं, जो मनुष्य और तकनीक के विकसित होते संबंधों की कहानी भी कहते हैं।
- विवेक रंजन श्रीवास्तव
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