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काव्य : क्रेता - डॉ सत्येंद्र सिंह ,पुणे, महाराष्ट्र



काव्य : 

क्रेता

हम सब बिके हुए हैं 
किसके हाथों, पता नहीं 
शायद,
विचारवानों के, विद्वानों के
सभ्यताओं के, शासनों के 
सत्ताओं या सत्ताधीशों के।

या कि
अपने अहम् के, मद मोह के 
समाज के, संसार के 
द्वेष के, आग्रहों के 
दुराग्रहों के,
पता नहीं।

बस यही पता करना है 
हम किसके हाथों बिके हैं 
यह पता चल जाए
तो मुक्त हो सकते हैं।
क्रेता से, छुटकारा 
पा सकते हैं।
लेकिन, बहुत सजग रहने की 
ज़रुरत है।

     - डॉ सत्येंद्र सिंह 
         पुणे, महाराष्ट्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. सत्येंद्र सिंह जी,
    सजग करती रचना लिखी है। अंतर्मुख कर देने के लिए साधुवाद! 🙏

    लतिका जाधव

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