कविकुलगुरु कालिदास भारत के भूगोलवेत्ता भी थे
महाकवि के साहित्य ने विश्व को आलोकित किया
कालिदास प्रसंग के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं के विचार
15 विद्यालयों के 350 विद्यार्थी हुए पुरस्कृत
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर। कवि कुलगुरू महाकवि कालिदास ने साहित्य की सभी विधाओं में अपने ग्रंथों की रचना की है उनके साहित्य में धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और पर्यावरण इन सभी का समावेश रहा। वे प्राचीन भारत के भूगोलवेत्ता थे।
यह विचार कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन और संस्कृति परिषद मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को दो दिवसीय आयोजित कालिदास प्रसंग के शुभारंभ समारोह में मुख्य वक्ता सारस्वत अतिथि प्रो. श्वेता जेजुरीकर ने व्यक्त किए । आप अध्यक्ष संस्कृत पालि प्राकृत विभाग महाराजा सयाजी राव विश्वविद्यालय बडौदा से विशेष रूप से कालिदास प्रसंग में मंदसौर पहुंची ।
आपने कहा कि उनके काव्य में नाट्य खंड व महाकाव्य में वर्णित विषयों का सालों से विमर्श हो रहा है उनके साहित्य का लोक बोध हर काल में प्रासंगिक है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा पाटीदार ने कहा कि महाकवि कालिदास का साहित्य उस प्रकाश की तरह है जो पूरे विश्व को आलोकित करता है। कविकुलगुरू ने जीवन मूल्यों की अमर व्याख्या की है। जो युगों युगों तक नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने महाकवि कालिदास के महान ग्रंथ मेघदूत ,अभिज्ञान शाकुंतलम, कुमार संभवम आदि का भी उल्लेख किया और कहा कि यह ग्रंथ भारत की ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए पूर्व विधायक व केंद्रीय हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि हम मंदसौर नगर और क्षेत्र वासियों को इस बात का गर्व है कि कवि कुलगुरू महाकवि कालिदास का संबंध मंदसौर से रहा है।प्राचीन नगरी उज्जैन के बाद यदि महाकवि ने किसी नगर का उल्लेख अपने ग्रंथों में किया है तो वह प्राचीन दशपुर यानी मंदसौर है ।महाकवि कालिदास सर्वकालिक हैं। विगत 12 वर्षों से यहां के साहित्य और संस्कृति प्रेमियों की भावना के अनुरूप मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा यह आयोजन चल रहा है भविष्य में इस समारोह को राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिष्ठित करने और महामहिम राष्ट्रपति ओर राज्यपाल महोदय को आमंत्रित करने का भी प्रयास किया जाएगा। श्री सिसोदिया में इस आयोजन की सफलता के लिए कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन को साधुवाद दिया और स्थानीय साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र के सहयोग कर्ताओं के प्रति भी कृतज्ञता के भाव प्रकट किए।
समारोह में विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी गुर्जर ने कहा कि महाकवि कालिदास प्रकृति, प्रेम और सौंदर्य के कवि थे उन्होंने काव्य में प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित करने का संदेश दिया है जिसे हम सभी को पालन करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि जिला क्लेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग ने कहा कि प्राय: महाकवि कालिदास की तुलना शेक्सपियर से की जाती है किंतु कालिदास जी का कार्यकाल तो शेक्सपियर से भी बहुत प्राचीन है इसलिए इस अवधारणा को बदलकर शेक्सपियर को पाश्चात्य का कालिदास कहा जाना चाहिए।
श्रीमती गर्ग ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा वर्णित गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्थाएं वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्थाओं की नींव हैं।
विशेष अतिथि शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ज्योति स्वरूप दुबे ने कहा कि महाकवि कालिदास ने अपने साहित्य के माध्यम से परिवार समाज और राष्ट्र का जो दिशा दर्शन किया है वह कहीं भी देखने या पढ़ने को नहीं मिलता। नई पीढ़ी के लिए उनका साहित्य अत्यंत प्रेरणा दायी है।
आरंभ में कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के निदेशक डॉ गोविंद दत्तात्रेय गंधे ने स्वागत उद्बोधन एवं समारोह की भूमिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि मंदसौर नगर वासियों की यहां के साहित्य और संस्कृति प्रेमियों की 12 वर्षों की तपस्या आज के इस समारोह में महती उपस्थित को देखकर सफल होती दिख रही है। इस वर्ष कालिदास प्रसंग में कालिदास संस्कृत अकादमी ने महाकवि कालिदास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। कालिदास को जानो प्रतियोगिता के माध्यम से सैकड़ो विद्यार्थी महाकवि कालिदास के साहित्य से जुड़े हैं। कालिदास मालवा के कवि थे। उज्जैन और मंदसौर से उनका संबंध रहा है।
अतिथियों का स्वागत अकादमी की ओर से
शाल ओढ़ा कर श्री फल भेंट कर किया। समारोह का संचालन स्थानीय संयोजक वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने किया आभार डॉ.घनश्याम बटवाल ने माना।
आरंभ में भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन ओर कलशपूजा की गई। मुख्य पुजारी पण्डित कैलाश चन्द्र भट्ट एवं पण्डित सुरेन्द्र आचार्य ने विधिपूर्वक पूजन अर्चना आरती कराई। पूजित कलश को समारोह स्थल कुशाभाऊ ठाकरे प्रेक्षागृह में स्थापित किया गया। महावीर द्वार चौराहे से कॉलेज परिसर तक कलश की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें नगर के गणमान्य जन स्कूल विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट्स शामिल हुए।
मंचीय समारोह उद्घाटन सत्र में "कालिदास को जानो" प्रतियोगिता में मंदसौर और आसपास के 15 विद्यालयों के शामिल हुए लगभग 350 विद्यार्थियों जिनमें विजेताओं और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
साथ ही इस प्रतियोगिता को संपन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महारानी लक्ष्मीबाई विद्यालय के प्रधानाध्यापक महेश कुमार त्रिवेदी एवं संस्कृत व्याख्याता श्रीमती अर्चना दवे को भी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विगत 12 वर्षों से दशपुर मन्दसौर में चल रहे कालिदास प्रसंग की स्थानीय सहयोगी टीम के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.घनश्याम बटवाल ब्रजेश जोशी, नरेंद्र कुमार त्रिवेदी, प्रदीप भाटी,सत्येंद्र सिंह सोम, गायत्री प्रसाद शर्मा, विजय सिंह पुरावत, लोकेश पालीवाल, अजीजुल्ला खान खालिद ,अनिल संगवानी, जयेश नागर आदि को मंच पर अतिथियों ने सम्मानित किया और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए
विद्यार्थियों के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का संचालन महेश त्रिवेदी ने किया अंत में अकादमी की ओर से आभार प्रभारी अनिल कुमार बारोड़ ने माना।
समारोह में श्री गुरुचरण बग्गा, रघुवीर सिंह चुंडावत, नरेंद्रसिंह सिपानी, रमेश चंद्र चंद्रे, विक्रम विद्यार्थी, महावीरअग्रवाल,राजाराम तंवरउज्जैन के श्री हेमंत शर्मा दिल्ली की डॉ मीनाक्षी सिंह डॉ ऋषिराज पाठक डॉ. दिनेश
तिवारी,भगवतीप्रसाद गेहलोद, नरेंद्र भावसार, नंदकिशोर राठौर,डॉ. देवेंद्र पुराणिक पंकज शर्मा पार्टनर, डॉ. रवींद्र कुमार सोहनी,प्रो. वीणा सिंह प्रो. के आर सूर्यवंशी,कन्हैयालाल भाटी, डॉ.प्रतिभा श्रीवास्तव,संगीता सिंह रावत, प्रकाश कल्याणी,कन्हैयालाल सोनगरा, पुलकित पटवा धर्मपाल सिंह देवड़ा नागेन्द्र श्रीवास्तव प्रकाश कल्याणी राजेंद्र पोरवाल दिलीप जोशी सुनील व्यास कन्हैया लाल भाटी आनंदीलाल पण्ड्या कन्हैया देशमुख
महाविद्यालय के प्राध्यापक गण विद्यार्थी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित थे।
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