लघु कथा : नाप - डॉ. रीटा अरोड़ा , करनाल
लघु कथा : नाप "चाची, ये ब्लाउज़ शाम तक तैयार हो जाएगा?" ग्राहक ने कपड़ा मेज़ पर रखते हु…
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लघुकथा : समाज रोहित ने अपनी माँ को अलमारी खोले उदास खड़े देख पूछा, माँ आप उदास क्यों रहती …
लघुकथा : पशुओं की शिक्षा व्यवस्था जंगल के राजा शेर ने फैशन-जगत की चतुर लोमड़ी को बुलाकर आदेश …
लघुकथा : बदले ताले “तुम्हें पता है, पिछले आपातकाल में सबसे ज़्यादा किस चीज़ की आवाज़ आती थी?” वा…
लघुकथा : आदत बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। "पापा, आज मत जाइए," बेटे ने छाता आ…
लघुकथा : चुप्पी का उत्तर "मम्मी, देखो मैंने क्या बनाया है!" राघव ने उत्साह से अपनी ड्र…
लघुकथा : मजबूत औरत प्रवीण का पति बहुत बीमार चल रहा है। पिछले एक महीने से हॉस्पिटल में एडमिट ह…
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लघुकथा : व्यंग्यकार की वापसी यात्रा बड़ी राजधानी में राष्ट्रीय सम्मान ग्रहण कर एक व्यंग्यकार छोटी राजधान…
लघु कथा : जाति ना पूछो खून की ज़िला अस्पताल के बाहर अफरा-तफरी मची थी। शहर के नामी वकील श्री नंदल…
कहानी : चक्रव्यूह - विवेक रंजन श्रीवास्तव ,भोपाल शाम के छह बज रहे थे। लंदन की खिड़की के ब…
लघुकथा : कॉल राहुल दिनभर मोबाइल पर व्यस्त रहता था। एक दिन उसकी माँ ने कहा— "बेटा, दादाजी…
लघुकथा : मूल्यों का क़द —विभा रानी श्रीवास्तव, पटना निखिल का पैतृक शहर विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गया।…
लघुकथा : मेहमानों के लिए बबीता बाज़ार से काजू-बादाम और किशमिश लेकर आई। सामान अलमारी में रखते हुए …
लघुकथा : "रिश्ते का नाम" "देखिए इनका आपरेशन होना है, कुछ भी हो सकता है, ये फा…
लघुकथा : मैं "मेरी नौकरी..." "मेरी गाड़ी..." "मेरा घर..." "मेरे बच्…
लघुकथा : उत्तरदायित्व सदियों पहले श्री मनसुख लाल जी अत्यंत अभावग्रस्त थे, संघर्ष के पलायन से वे पत्नी फु…
कहानी : पहचान बंगले के गेट पर गाड़ी रुकते ही मेरी तंद्रा टूटी| मैने अपना बैग संभाला और कार से नीचे उतरकर …
लघु कथा : भरोसा शंकर दयाल जी के रिटायर होने में दो साल बाकी रह गए हैं। उ…
लघुकथा : दर्द की रात शादी के बाद पहली रात… रीना कमरे के कोने में डरी सहमी सी बैठी थी। पति सोहन लाल कमर…