लघुकथा :
मजबूत औरत
प्रवीण का पति बहुत बीमार चल रहा है। पिछले एक महीने से हॉस्पिटल में एडमिट है।
“प्रवीण बहुत मजबूत औरत है!”
सब उसकी तारीफ कर रहे थे—
“देखो, हँस रही है, लोगों में आ-जा भी रही है…”
घुमंतू खड़ा सुन रहा था।
उसे कल का दृश्य याद आया—
अस्पताल के वॉशरूम में प्रवीण
नल खोलकर रो रही थी…
ताकि आवाज़ पानी में घुल जाए।
घुमंतू मुस्कुराया—
“समाज को ‘मजबूत’ लोग बहुत पसंद हैं…
क्योंकि उनकी टूटन की ज़िम्मेदारी
फिर किसी को नहीं उठानी पड़ती।”
- डॉ अंजना गर्ग ( सेवानिवृत)
म द वि रोहतक
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कथा कहानी
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