लघुकथा :
मैं
"मेरी नौकरी..."
"मेरी गाड़ी..."
"मेरा घर..."
"मेरे बच्चे..."
राकेश लगातार बोल रहा था।
घुमंतू सुनता रहा।
इतने में उसकी पत्नी सीमा पानी रख गई।
घुमंतू मुस्कुराया और बोला—
"तुम्हारी बातों में सब कुछ है—
नौकरी, गाड़ी, घर, बच्चे...
बस एक शब्द नहीं है।"
"कौन सा?" राकेश ने पूछा।
घुमंतू बोला—
"'हम'।
और जिस घर से 'हम' चला जाए,
वहाँ सिर्फ़ लोग रहते हैं, रिश्ते नहीं।"
- डॉ अंजना गर्ग (सेवानिवृत)
म द वि रोहतक
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कथा कहानी
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