इंडी गठबन्धन की बैठक , ढाक के तीन पात : दिशाहीन विपक्ष के पास जनहित में कोई वैचारिक ठोस नीति नहीं
दिल्ली में हुई इंडी गठबंधन के बाईस विपक्षी दलों की बैठक में देश हित में कोई फैसला नहीं लिया गया । सिवाय इसके की गठबंधन सी जे आई को पत्र लिखेगा । जिसमें एस आई आर और वोट लूट के मुद्दे को उठाया जाएगा । सबको पता है कि एस आई आर पर बंगाल की तत्कालीन ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट तक जा चुकी थी और सुप्रीम कोर्ट ने एस आई आर को रोकने की मांग खारिज कर दी थी । संविधान की बात करने वाला विपक्ष एस आई आर रोकने की मांग कर संविधान को ताक पर रखना चाहता है । रही वोट लूट की बात तो पांच राज्यों के चुनाव में दो राज्य केरल और तमिलनाडु में विपक्षी दलों की सरकारे आई है । क्या वहां पर विपक्ष को वोट लूट नहीं दिखाई दिया ? यह बहुत ही सामान्य सी जनता के द्वारा समझे जाने वाली बातें हैं । और ऐसे मुद्दे जनता के सामने कहीं नहीं टिकते , तो सुप्रीम कोर्ट में क्या ही टिकेंगे ।
बैठक में परीक्षाओं के पेपर लीक होने होने पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है । पेपर लीक होना गंभीर और विचारणीय विषय है । यह देश के युवा वर्ग से खिलवाड़ है । पर ऐसा भाजपा से पहले कांग्रेस सहित अन्य सरकारों में भी होता रहा है । पर इस बात से पेपर लीक को जस्टिफाई नहीं किया जा सकता । गलत तो गलत ही है । पर गलत करने वाला कौन है , यह विचारणीय विषय है ? किसी भी एक अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा में एक लाख से दो लाख तक के व्यक्तियों का शिक्षकों का कर्मचारीयो का सहयोग रहता है । और इनमें से कुछ पैसों के लालच में आकर पेपर आउट कर देते हैं । जिसके लिए निश्चित रूप से इसे रोकने की कोई प्रणाली विकसित कि जानी चाहिए। सभी को पता है कि भ्रष्टाचार हमारे देश में शिष्टाचार और लोकाचार बन चुका है । ऐसे में हमें इसे रोकने के लिए स्वयं का आत्म चिंतन करना होगा । हर सरकार की तरह और हर बार पेपर लीक या कोई भी घटना दुर्घटना होने पर जांच आयोग की नियुक्ति कर दी जाती है और इस बार भी हो रही है ।
बैठक में तीसरा निर्णय लिया गया कि महंगाई ,पेपर लीक,बेरोजगारी इन मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की जाए । जब संसद चलती है तो विपक्ष संसद नहीं चलने देता । जनता स्वयं दूरदर्शन पर विपक्ष का आचरण देखती है । उस समय वह जनता का कोई मुद्दा नहीं उठाता । संसद में तमाम विपक्षियों दलों द्वारा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और संसद को न चलने देने की भरपूर कोशिश की जाती है । ऐसे में सरकार से सर्व दलीय बैठक की मांग करना एक मजाक ही लगता है । विपक्ष खुद तमाम संवैधानिक संस्थाओं चुनाव आयोग ,न्यायपालिका, सीबीआई ,ईडी सभी का मजाक बनाता है और बात लोकतंत्र की रक्षा की करता है । गठबंधन की इस बैठक से तय हो गया कि विपक्ष के बाद चुनाव आयोग को कोसने के अलावा और कोई नया मुद्दा नहीं है जिससे की जनता में कोई संदेश जा सके । जब विपक्ष जीते तो उसे लोकतंत्र, संविधान और चुनाव प्रणाली पर संकट नहीं दिखता और जब हारता है तो उसे सब जगह काला ही काला दिखाई पड़ने लगता है । विपक्षी दलों की यह एकता कितनी सार्थक है यह तो इससे ही पता चलता है की तमिलनाडु में कांग्रेस के भीतर घात के कारण द्रमुक ने इंडी गठबंधन को छोड़ दिया । आप पहले ही से दूरी बना चुका है । तो इधर तृण मूल कांग्रेस में राज्य स्तर पर फुट के बाद केंद्रीय स्तर पर उसके सांसदों ने भी अपना अलग गुट बनाने का फैसला कर लिया है । इसे ममता बनर्जी की तृण मूल कांग्रेस का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है । जैसा कि पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ हो चुका है । ऐसा ही बंगाल में हो गया है । ममता बनर्जी जो कल तक स्वयं को इंडि गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए आगे कर रही थी ,अब इस गठबंधन को आगे बढ़ाने की बात कर रही है । अपना अस्तित्व बचाने के लिए इंडी गठबंधन का साथ देने की बात कर रही है ।
अब कांग्रेस के मजे ही मजे हैं । अब कांग्रेस के सामने किसी भी क्षेत्रीय या राज्य के दल का कोई ऐसा नेता नहीं रह गया जो राष्ट्रीय स्तर पर इस इंडि गठबंधन का नेतृत्व कर सके । इस बैठक में ईरान इराक युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर आने वाली आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए कोई चर्चा नहीं की गई। जबकी इस कारण पूरे विश्व में महंगाई बढ़ गई है । गठबंधन की बैठक से तय हो गया कि विपक्ष दिशाहीन है ,और देश में कोई फैसला नहीं ले सकता । विपक्ष के पास कोई ठोस वैचारिक योजना देश के लिए नहीं है।
- इंजी. कवि अतिवीर जैन ' पराग '
पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय
कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001
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