लघुकथा :
कॉल
राहुल दिनभर मोबाइल पर व्यस्त रहता था।
एक दिन उसकी माँ ने कहा— "बेटा, दादाजी का फोन आया था। उनसे बात कर ले।"
"बाद में बात कर लूँगा।" राहुल ने फोन से नजरें उठाए बिना कहा।
यह "बाद में" कई दिनों तक चलता रहा।
एक शाम दादाजी के नंबर से फोन आया।
पर इस बार आवाज़ किसी और की थी। गाँव वाले चाचा जी बोल रहे थे।
"बेटा... बाबूजी नहीं रहे।"
राहुल की नज़र मोबाइल की स्क्रीन पर टिक गई।
उसने देखा— दादाजी की दस मिस्ड कॉल अब भी वहीं पड़ी थीं।
पहली बार उसे महसूस हुआ कि कुछ कॉल दोबारा नहीं आते।
- डॉ अंजना गर्ग (सेवानिवृत)
म द वि रोहतक
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कथा कहानी
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