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मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में चीता भाईयों ने दिखाई समन्वय की ताकत


 

मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में चीता भाईयों ने दिखाई समन्वय की ताकत  

फिल्मी जोड़ी की तरह सपोर्टिव व्यवहार पॉजिटिव रिस्पांस बता रहा 

प्रभास ओर पावक चीतों ने मिलकर 100 से ज्यादा शिकार किए ओर डेढ़ हजार किलोमीटर भ्रमण कर दौड़ लगाई - जुलाई माह में 2 ओर चीते छोड़े जाएंगे 

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर! कोई एक साल पहले अप्रैल 2025 में पहली बार मन्दसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में दक्षिण अफ्रीका से लाये दो चीते छोड़े गए थे इस दौरान दोनों का व्यवहार शिकार और समन्वित समर्थन जताकर रहना रेकॉर्ड दर्ज़ हो रहा है वहीं फॉरेस्ट विशेषज्ञ इसे पॉजिटिव रिस्पांस बता रहे हैं । फिल्मी जोड़ी के बारे जो देखने में आया कुछ ऐसा ही नजारा अब गांधीसागर अभयारण्य में देखने को मिल रहा है। दोनों की जोड़ी जैसे करण अर्जुन की जोड़ी जैसे लग रही है ।  अफ्रीकी देश कूनो से अप्रैल 2025 में यहां लाए गए चीते प्रभास और पावक खुले जंगल में एक-दूसरे का साथ निभाते हुए न सिर्फ सफल शिकार कर रहे हैं, बल्कि हर खतरे के सामने भाई की ढाल भी बन रहे हैं। दोनों के बेहतरीन तालमेल, भरोसे और सर्वाइवल रणनीति ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है। 

अप्रैल 2025 में कूनो से दो दक्षिण अफ्रीकी चीते प्रभास और पावक गांधीसागर भेजे गए थे ओर पहली बार गांधीसागर अभ्यारण्य में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने दोनों सगे भाई चीतों को छोड़ा था तब नई सेंचुरी ओर नयी परिस्थिति में दोनों का सर्वाइवल चुनौती के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन, एक साल में इन्होंने जिस तरह तालमेल के साथ शिकार और एक-दूसरे को सुरक्षा देने की रणनीति दिखाई है, उससे विशेषज्ञ भी हैरान हैं और इसे पॉजिटिव रिस्पांस बता रहे हैं। कूनो के बाड़ों में रहने वाले 8 साल के ये भाई खुले जंगल में  हैं। इनके व्यवहार के अध्ययन में दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं। गांधीसागर में नीलगाय, चीतल  , हिरण की काफी संख्या होने से शिकार आधार मजबूत है। हालांकि यहां तीन तेंदुए भी हैं। इसलिए प्रभास और पावक को प्रोटेक्टेड ज़ोन 'प्रोटेक्टर-पैक एनक्लोजर' में छोड़ा गया है, जहां बाहरी प्रेडेटर नहीं आ सकते।  

*चीता संरक्षण रणनीति का हिस्सा बनेगा*  

प्रभास-पावक के साथ 9 साल की मादा चीता धीरा को भी लाया गया है पर अभी मादा चिता धीरा को पृथक बाड़े में छोड़ा गया है उसके पारिस्थितिक अनुकूलन बाद नर- मादा को साथ छोड़ जाने की योजना है । 

पीसीएफ वाइल्ड लाइफ समीता राजोरी कहती हैं, प्रभास व पावक चीतों पर अध्ययन से भारतीय जंगलों में चीतों के अनुकूलन को समझने में मदद मिली है। 

हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वन विभाग की प्रस्तावित योजना पर चर्चा कर तय किया है कि आगामी जुलाई माह में गांधीसागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 2 चीते नर और मादा छोड़े जाएंगे । चीतों का कुनबा बढ़ेगा दो ओर आने से नर मादा सहित संख्या पांच हो जाएगी ।

प्रभास एवं पावक दोनों चीतों ने अबतक 100 से अधिक शिकार किए ओर लगभग 1460 किमी क्षेत्र में भ्रमण कर दौड़ लगाई है । ये अध्ययन भविष्य की चीता संरक्षण रणनीति का अहम हिस्सा बनेगा।  

*अभ्यारण्य की परिस्थितियों में सर्वाइवल के लिए सबसे अहम 3 बातें*  

वन विभाग के विशेषज्ञों और चीतों की मॉनिटरिंग कर रहे अधिकारियों के अनुसार 

1. *स्प्लिट अटैक पैटर्न...* 

चिकारा, हिरण, नीलगाय आदि को एक चीता लंबी दौड़ में उलझाकर उसकी ऊर्जा खत्म करता है, जबकि दूसरा पहले से तय दिशा में कट मारकर पहुंचता है और हमला करता है। शिकार को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। वन अधिकारी इसे स्प्लिट अटैक पैटर्न कहते हैं, जो गांधीसागर अभ्यारण्य के खुले जंगल में सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। 

 2. *सेडी प्रोटेक्शन सिस्टम...* 

 एक चीता शिकार खाता है तो दूसरा उसके आसपास सुरक्षा घेरा बनाकर घूमता रहता है। कई बार दोनों को पीठ जोड़कर बैठे देखा गया, ताकि चारों ओर नजर रहे। फ़ॉरेस्ट विशेषज्ञ अनुसार यह सेडी प्रोटेक्शन सिस्टम कहते हैं। यह व्यवहार जंगली परिस्थितियों में लंबे समय तक सर्वाइवल करने की एडवांस रणनीति माना जाता है।  

3. *ट्रस्ट बॉन्डिंग बिहेवियर...* 

कई बार दोनों एक-दूसरे को चाटकर साफ करते दिखाई दिए। फॉरेस्ट विशेषज्ञ इसे ट्रस्ट बॉन्डिंग बिहेवियर कहते हैं। एक सुस्त पड़ता है तो दूसरा पास बना रहता है। दोनों में समन्वय कोऑपरेशन वाले सभी गुण जैसे साथ रहना, शिकार में मदद, ज्यादा दूरी होने पर संकेत कॉल करना आदि पाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि मंदसौर जिले का गांधीसागर अभ्यारण्य प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण होकर पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है यहां सभी वन्य जीवों के साथ जलचर नभचर और उभयचर जीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं । मत्स्य उत्पादन में अग्रणी है और जलाशय में विदेशी प्रवासी पक्षियों को देखा जाता है और यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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