लघुकथा :
दर्द की रात
शादी के बाद पहली रात…
रीना कमरे के कोने में डरी सहमी सी बैठी थी।
पति सोहन लाल कमरे में आया, वो और सिकुड़ गई।
वह बोला,
“डर क्यों रही हो? अब मैं तुम्हारा पति हूँ और तुम मेरी पत्नी हो…”
रीना ने डरते हुए कहा,
“मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा… मुझे बस घर जाना है…”
वह हँस पड़ा—
“अब यही तुम्हारा घर है… और जो मैं कहूँगा, वो तुम्हें करना पड़ेगा।” यह कहते हुए उसने रीना को पकड़ा और बेड पर धकेल दिया।
रीना ने रोते हुए कहा, "मुझे माँ के पास जाने दो।"
सोहन लाल ने उसकी कोई बात नहीं सुनी और पति धर्म निभाने लगा।
रीना दर्द से कराहती रही।
उस रात,
एक बच्ची की मासूमियत…
और उसका शरीर—दोनों टूट गए।
- डॉ अंजना गर्ग ( सेवानिवृत)
म द वि रोहतक
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कथा कहानी
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