प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल। राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा *पानी* विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल के संरक्षण में एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजश्री रावत के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ ग़ज़लकार प्रदीप कश्यप के विशेष आतिथ्य में तथा डॉ.अनीता तिवारी के संचालन में किया गया.
इस अवसर पर पिछली काव्य गोष्ठी की सर्वश्रेष्ठ चुनी गई रचनाओं के लिये संतोष कुमार सोनी एवं बी एल गोहिया को सरस्वती प्रभा सम्मान से अलंकृत किया गया.
सरस्वती वंदना के उपरान्त काव्य गोष्ठी के आरम्भ में प्रदीप कश्यप ने पढ़ा " बादल पानी लाए जब बुझी धरा की प्यास, सूखी धरती हरियाई बंधी सुखों की आस" वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा " हादसा इतना बड़ा था जिसमें मर सकता था मैं, अब लगा मुझको ज़मी पर दाना पानी और है " वहीं कुसुम श्रीवास्तव ने पढ़ा " सावरी घटा कि गागर से छलका पानी. तब झूम के प्यासी धरा पर बरसा पानी " वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा " भवसागर से पार उतरते अक्सर सिद्धि ज्ञानी. मूर्खों के लिये काफ़ी महेश एक अंजुरी पानी" वहीँ हीरालाल पारस ने पढ़ा " रुक जाये तो दलदल, बहता रहे तो सरिता " वहीं डॉ. प्रतिभा द्विवेदी ने पढ़ा " करुणा नहीं ह्रदय में तिल भर,नहीं नयन में पानी है " वहीं हरिओम सोनी ने पढ़ा " अक्स ठहरता नहीं है बहते पानी में, गर देखना है खुद के भीतर देखें क्यों अश्क देखें पानी में " वहीं डॉ राजश्री रावत ने पढ़ा "तुम अपने आप को विश्वास इक दिन बदल लोगे. ज्यादा देर पानी के शरारे रह नहीं पाते. वहीं आबिद काजमी ने पढ़ा " मेरा दावा है के जन्नत को वो देखेगा जरूर, जो भी मरते हुये इन्सान को पानी देगा ".इनके अलावा 40 रचनाकारों ने भाग लिया.
अंत में रमेश नन्द ने सभी का आभार व्यक्त किया.
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साहित्यिक समाचार
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