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काव्य : अनुदित जननी त्याग - आदर्श ठाकुर ,सागर


 काव्य : 

अनुदित  जननी  त्याग


प्रगाढ़ बुद्धि भी नहीं , प्रकृष्ट अक्षर भी नहीं,

प्रबुद्धता पूरित नहीं," वह कलम अभी  सृजित नहीं"

अनुदित है, करने व्यक्त "जननी  त्याग"को

उस दिव्यता के भाव को।


अधिलोक सकल से भी नहीं,अक्षुण्ण रसातल भी नहीं

ब्रह्नाण्ड भी पूरित नहीं , वह लोक अभी सृजित नहीं 

अनुदित है,  करने व्यक्त " जननी   त्याग"को,

उस दिव्यता के भाव को। 

  

ब्रह्मामुरारी, शिव नहीं , दिनकर -कलाधर भी नहीं,

कोटि देवों की पूरित नहीं, "वह तेज अभी सृजित नहीं"

अनुदित है, करने व्यक्त "जननी  त्याग"को

उस दिव्यता के भाव को।

                        

-   आदर्श ठाकुर 

  (डॉ. हरीसिंह गौर वि.वि. सागर ,मप्र)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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