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भावुक हुई अयोध्या: राजतिलक की जगह मिला वनवास, सत्य और पितृ-भक्ति की राह पर निकले श्रीराम


 

भावुक हुई अयोध्या: राजतिलक की जगह मिला वनवास, सत्य और पितृ-भक्ति की राह पर निकले श्रीराम

श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का पंचम दिवस

इटारसी। संपूर्ण नर्मदांचल की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर परिसर तुलसी चौक में 63वे वर्ष में श्री रामजन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। इस वर्ष श्रीमद प्रयागपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज बाल्मीकि एवं तुलसीदासकृत रामायण पर प्रवचन दे रहे हैं।

पंचम दिवस की कथा में व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि जिस नगरी में कल तक उत्सव की तैयारिया हो रही थीं और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के राज्याभिषेक की प्रतीक्षा थी, आज वहां का कोना-कोना सिसकियों और आंसुओं से भर गया है। रघुकुल की रीति और पिता के वचनों को निभाने के लिए राजकुमार राम ने स्वेच्छा से 14 वर्ष के वनवास को स्वीकार कर लिया है। उनके साथ माता सीता और अनुज लक्ष्मण ने भी राजसी सुखों का त्याग कर वन गमन का मार्ग चुना है। राजा दशरथ ने धर्मसंकट में घिरते हुए भी 'रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाई पर बचनु न जाई' की परंपरा को अक्षुण्ण रखा।

​जब श्री राम को वनवास की सूचना मिली, तो उनके चेहरे पर तनिक भी शिकन या दुःख नहीं था। उन्होंने इसे विधाता का विधान और पिता की आज्ञा मानकर सहर्ष स्वीकार किया। उनके इस धैर्य ने उपस्थित जनसमूह को चकित कर दिया। श्रीराम ने कहा, "पिता के वचनों की रक्षा करना ही पुत्र का परम धर्म है।" ​राजकुमार राम अकेले वन नहीं जा रहे हैं। माता सीता ने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए महलों के ऐश्वर्य को ठुकरा कर कांटों भरी राह को चुना। वहीं, लक्ष्मण जी ने भी भाई के प्रति अपनी अटूट भक्ति दिखाते हुए उनके साथ वन जाने का निर्णय लिया। तीनों विभूतियों ने राजसी वस्त्राभूषण त्याग कर वल्कल वस्त्र (तपस्वी वेश) धारण कर लिए हैं। ​जब श्री राम का रथ महल के द्वार से बाहर निकला, तो पूरी अयोध्या उनके पीछे दौड़ पड़ी। सरयू तट तक उमड़े जनसैलाब की आँखों में अश्रुधारा थमती नहीं दिख रही थी। हर नागरिक अपने प्रिय राजकुमार को रोकने का प्रयास कर रहा था, किंतु श्रीराम अपनी सत्यनिष्ठा पर अडिग रहे। महाराज श्री ने वनवास गमन की पूरी कथा मार्मिक रूप से विस्तार से श्रोताओं को सुनाई। 

आयोजन समिति के प्रवक्ता भूपेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एवं संरक्षक प्रमोद पगारे पत्रकार के मार्गदर्शन में श्री द्वारकाधीश मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री का स्वागत एवं पूजन समिति के अध्यक्ष नीरज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक, उपाध्यक्ष विष्णु शंकर पांडे, सचिव अभिषेक तिवारी, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र दुबे, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सहकोषाध्यक्ष अमित सेठ, देवेंद्र पटेल, एमएल गौर, दिनेश सैनी, प्रहलाद बंग, सुरेंद्र सिंह ठाकुर(बबली), आभा ठाकुर, नरेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र अग्रवाल, सुरेंद्र अग्रवाल सेमरी वाले, अग्रवाल समाज, जैन समाज इटारसी के पदाधिकारियों सहित समिति पदाधिकारियों ने महाराज श्री का व्यासपीठ पर पूजन एवं स्वागत किया। 

प्रवचन में हारमोनियम पर दिलीप जी, तबले पर दीपक दुबे, बैंजो पर श्रीराम जी, सहित संकटा प्रसाद मिश्र, दुर्गादत्त तिवारी एवं राहुल जी ने भजनों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी।

आयोजन समिति ने शहर के नागरिकों से कथा श्रवण करने पधारने का निवेदन किया है।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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