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काव्य : बांटना है तो सबको खुशी बांटिये-सीताराम साहू"निर्मल"छतरपुर


काव्य : 

बांटना है तो सबको खुशी बांटिये

////////////////गीत////////////////

बांटना है तो सबको खुशी बांटिये,
सबने दामन में गम हैं सजाए हुए। 
खुशियोँ जो,है मिली सोचते हैं नही,,
देखते गम है खुशियां भुलाए हुए। 

देने वाला भी  देकर  यही सोचता,
खुशियाँ देखे नही कैसा नादाॅन है।
और से कितना ज्यादा मिला है इसे,
सोचता यह नही,बनता अंजान है। 

गम दिखाता सभी को है रोते हुए, 
अपनी खुशियां सभी से छुपाए हुए। 
बांटना है तो सबको,,,,,,,

लोग अपने से,,,,, नीचे नही देखते,
देखकर आशमा सब दुखी आज है।
दूसरों की है खुशियां रुलाती उन्हें,
अपनी खुशियों नही देखे मुहताज है। 

दूसरों की खुशी में भी खुश होइए,
साथ सबका सभी से निभाए हुए। 
बांटना है तो सबको,,,,,,,,, 

राह में कोई,,,,,, रोते हुए जो मिले,
देके साहस उसे कुछ हंसा दीजिए। 
खुशियों जो उनकी है याद उनको करा,
उनके दिल दर्द को फिर भगा दीजिए। 

उनको भी खुश रखे और हंसाए सदा,
जो जमाने से निर्मल सताए हुए। 
बांटना है तो सबको,,,,,,,, 

- सीताराम साहू"निर्मल"छतरपुर मप्र
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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