ad

काव्य : लाल सूरज का काल - डॉ आदेश कुमार पंकज ,शाहजहाँपुर


काव्य : 

लाल सूरज का काल


क्षितिज पर
धीरे-धीरे उतरता
वह लाल सूरज
सिर्फ संध्या का रंग नहीं,
समय की थकी हुई आँखों का
जलता हुआ सत्य है।

दिन भर
संघर्षों की धूप में तपकर
जब मन
अपने ही प्रश्नों से घिर जाता है,
तब यही लालिमा
रक्तिम आकाश बनकर
भीतर के मौन को आवाज़ देती है।

कितनी बार
जीवन ने
आशाओं के सुनहरे द्वार खोले,
और फिर
उसी क्षण
समय ने कठोर हथेलियों से
सपनों को परखा।

लाल सूरज का काल
वह घड़ी है
जब आदमी
अपने ही भीतर
एक युद्ध लड़ता है—
बिना शस्त्र,
बिना शोर,
सिर्फ धैर्य की अग्नि लेकर।

यह वही समय है
जब आँखों में
थकान के बादल होते हैं,
किन्तु आत्मा में
अब भी बची रहती है
एक छोटी-सी रोशनी।

सूरज डूबता अवश्य है,
पर उसकी लाली
यह कह जाती है—
हर अंत
अंधकार नहीं होता,
कुछ अस्त होते क्षण
नए प्रभात की भूमिका भी लिखते हैं।

आओ,
हम भी अपने भीतर
उस लाल सूरज को महसूस करें
जो तपकर, टूटकर,
फिर भी
उजाला छोड़ जाना जानता है।

 - डॉ आदेश कुमार पंकज
अवकाश प्राप्त 
विभागाध्यक्ष गणित शास्त्र 
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post