काव्य :
दोहा
मृदुल वाणी अच्छी लगे,
जैसे कोयल बोल |
बोले सोच विचार के,
जिसका होता मोल ||
बिके वस्तु बाजार में,
कम अधिक हो दाम |
माँ की ममता ना मिले,
बसती दिल के धाम ||
- विनोद शर्मा ,गाजियाबाद
Tags:
काव्य
.jpg)
दोहा
मृदुल वाणी अच्छी लगे,
जैसे कोयल बोल |
बोले सोच विचार के,
जिसका होता मोल ||
बिके वस्तु बाजार में,
कम अधिक हो दाम |
माँ की ममता ना मिले,
बसती दिल के धाम ||
- विनोद शर्मा ,गाजियाबाद