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गीतों ,गजलों और कविताओं से सजी काव्य चौपाल की महफिल


 

गीतों ,गजलों और कविताओं से सजी काव्य चौपाल की महफिल 

भोपाल ।  अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश ईकाई द्वारा  काव्य चौपाल 17 अगस्त 2025 की दोपहर कोलार में आयोजित की गई। 

कार्यक्रम का शुभारंभ  जया आर्या जी के ‘अच्युतम केशवम’ कृष्ण स्तुति से हुआ। 

कविता वाचन का प्रारंभ वरिष्ठ सदस्य गोकुल सोनी जी की कविता से हुआ।

कल तलक किरदार था जिनका अपावन।

आज जाने कैसे चंदन हो गए हैं।

है निशा भी अनमनी सी वक्त गूंगा।

और दिन भी अब अमंगल हो गए हैं। 

रामायण केन्द्र भोपाल के निदेशक डॉ राजेश श्रीवास्तव जी ने अपनी एक मनभावन सी कविता पढ़ कार्यक्रम को गति दी…

एक समन्दर ढूंढ रहा हूं 

मोती अन्दर ढूंढ रहा हूं।।

तेरे दर से क्या है बेहतर

तेरा ही घर ढूंढ रहा हूं।।

संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी ने मानो अपनी मन की कलम से कविता लिखी जिसे सभी ने खूब सराहा…

तुम्हें मुझसे मिलने के लिए

 मेरी किताबों के दरवाजे खटखटाने होंगे

जैसे ही दरवाजा खुलेगा

किताबों के किरदार  

तुम्हारा स्वागत करेंगे

तुमसे बतियाएंगे

 नीलिमा रंजन जी ने पंद्रह अगस्त पर  एक विचारणीय कविता पढ़ी।

पंद्रह अगस्त का यह अवसर

स्मरणीय मील का नव पाथर

लघु कथा शोध केन्द्र की अध्यक्ष कांता राय जी ने दो छोटी सुन्दर कविताएं सुनाईं जिससे एक गंभीरता स्थापित हुई।

जब दुखी हो मन

जब उलझन हो कोई

तब जाने क्यों 

दोस्त बहुत याद आते हैं!

अक्षरा पत्रिका की संपादक जया केतकी जी ने स्त्री की दो छवियां उद्धृत की

सरोज लता सोनी ने  “सत्यमेव जयते”  कविता

जाने क्यों दुनिया में,

 झूठ का पसारा है।

 जिसका कोई ओर न छोर,

 ना ही सिरमौर है ,

फिर भी असत्य ने,

 पांव को पसारा है । सुनाई

 संस्था के महासचिव मुजफ़्फ़र सिद्दिकी ने देश प्रेम से भरी कविता 

ऐ मेरे प्यारे वतन तू ही मेरी जान है।

रौशनी का मीनार तू सपनों का जहान है।

सुनाई

मधुलिका सक्सेना ने 

"मधुर सुहानी याद लिए 

रक्षाबंधन जब आता है।" सुनाई

 जया आर्य ने “क्यों” कविता 

मेरे क्यों का जवाब दे सकोगे क्या तुम, प्रियवर,

वफा और जफा में फर्क क्यों न समझा सके तुम,

शायद उलझ गए इन दोनों में,

 वफा तो वफा है, जफा जान लेवा है,

सुनाई

 मृदुल त्यागी जी  की *मन* कविता 

मन है दीपक आशाओं का 

कभी गिरे तो फिर संभल जाता 

कभी अकेला चुप गुमसुम सा 

कल्पनाओं के रंग सजाता।

 महिमा श्रीवास्तव वर्मा  ने नई उड़ान भरी। 

ठूंठ हो गए वृक्ष ने सोचा 

काश! जवानी की मस्ती में झूम झूमकर 

सारे पत्ते न गिराए होते

संस्था की ईकाई अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव जी की “मेरी बिटिया” कविता सबके मन के तार छू गई। 

तुम रहो ज़िंदगी से लबरेज़ 

आज़ाद परिंदा हो 

मत रहना ग़ुलाम बन कर ,

प्रतीक्षारत रहना 

सुनहरा कल बाट जोह रहा है ।

रानी सुमिता ने तीन क्षणिकाएं सुना कर समां बांध दिया। उनकी  “आदत” क्षणिका को दाद मिली..

झरोखे की झिर्री जरा खुली रखना 

ऐ बचपन  !

मुझे ताक झांक की बड़ी आदत है

झाँकते घडी 

गिर जाऊँ उस ओर यदि,

इस ओर फिर धकेलने की

जिद मत धरना ऐ बचपन !!  

इस कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था की निदेशक महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने किया।

मध्य प्रदेश ईकाई के काव्य चौपाल की प्रतिमास होने वाली यह ग्यारहवीं बैठक थी। कवि-कवयित्रियों की पुरजोर भागीदारी काव्य चौपाल की अवधारणा की सफलता का सूचक है । 

प्रस्तुति

रानी सुमिता

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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