बच्चों को समझाये प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के गुर
मंदसौर। जहां सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रदूषण को एक लाइलाज समस्या के रूप में देखा जाने लगा है वहीं छोटे- छोटे स्कूली बच्चों के बीच अत्यंत सरल और व्यवहारिक तरीकों से इस समस्या से कैसे दो- चार हो सकते हैं यह सब सिर्फ एक घंटे की कार्यशाला में श्रीमती चन्दा डांगी ने स्थानीय रामटेकरी के सनराइज युनिवर्स स्कूल में समझाया। एक पुराने बनियान या टीशर्ट से बिना सिलाई किये कुछ ही सेकंडों में केरी बैग बनते देखकर बच्चों ने दांतों तले उंगली दबा ली। एक स्टील का छोटा गिलास, एक चम्मच और एक कपड़े की थैली एक पर्स में साथ रखकर सैंकडों डिस्पोजल और सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैग से आसानी से निजात पाई जा सकती है।
अपने जन्मदिन पर बच्चों को चाकलेट वितरण तो किया परंतु चाकलेट के रैपर एक खाली प्लास्टिक की बोतल में वापस इकट्ठे करवाए ।इस नवाचार को उन्होंने नाम दिया "प्लास्टिक के जिन्न को बोतल में बंद करें" । इस अवसर पर बच्चों ने प्लास्टिक की अनुपयोगी फ्रेम (जो कि इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का पेकिंग वेस्ट था) में मिट्टी भरकर पपीते के बीज भी बोए जिनके पौधे बनने पर वे अपने घर के बगीचे में उन्हें लगाकर मीठे पपीते प्राप्त कर सकेंगे। बच्चों के उत्साह को देखकर ऐसा लगता है कि वे अपने बचपन और भविष्य के प्रति पर्यावरणीय जागरूकता के लिए संकल्पित है, बड़ों का भविष्य बड़े जानें।
विद्यालय प्राचार्य डॉ दीपेश भागवत ने इस कार्यशाला के लिए डांगी दम्पति का आभार व्यक्त किया।
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