संस्मरण
शिक्षक दिवस
वैसे तो मुझे बचपन से लेकर अबतक सभी गुरुजनों का भरपूर स्नेह और आशीर्वाद मिला कुछ बातें अविस्मरणीय हो जाती है उनमें से एक वाक़या मैं आपके सामने रखना चाहती हूं __ कन्या विद्यालय से आठवीं करने के बाद जब नोंवी कक्षा में बालकों के विद्यालय में प्रवेश लिया तो मन में थोड़ा डर सा रहता था चालीस बच्चों में सिर्फ छह लड़कियां तो मैं थोड़ी सहमीं - सहमीं सी रहती थी लेकिन विद्यालय नियमित जाना और गृहकार्य समय पर करने की वजह से हमारे हिन्दी विषय के व्याख्याता श्री हरि वल्लभ जी आमेटा का मेरे ऊपर भरोसा कायम हो गया था और वो व्याकरण हो या कोई सवाल जवाब की उनकी काॅपी पूरी कक्षा में वह सिर्फ मुझे देते थे कि तुम इसे अपनी काॅपी में उतार लो और फिर पूरी कक्षा को अपनी काॅपी से लिखने के लिए दे देना ।
गुरु जी का इतना विश्वास पाकर उस समय ही नहीं आज भी अपने आप को गौरवान्वित महसूस करतीं हूं।
मेरे अब तक के सारे गुरुजनों को ह्रदय से प्रणाम करती हूं।
- चन्दा डांगी रेकी ग्रेंडमास्टर
मंदसौर मध्यप्रदेश
.jpg)
