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पावगिरि में दशलक्षण व्रतों के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की हुई आराधना


 पावगिरि में दशलक्षण व्रतों के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की हुई आराधना

हमारे देश में राग की नहीं त्याग की पूजा होती है - पं. संतोष कुमार

पर पदार्थों का त्याग किये बिना संसार से पार नहीं हो सकते - सजल भैया

तालबेहट(ललितपुर) । सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित कसबे के दोनों जैन मंदिरों में दशलक्षण व्रतों के नौवें दिन शुक्रवार को सुबह धर्माबिलंबियों ने मंदिर पहुँचकर नित्यमय अभिषेक शांतिधारा पूजन विधान की क्रियाओं के सहभागी बने एवं उत्तम आकिंचन धर्म को अंगीकार किया। तत्पश्चात उमस्वामी कृत तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन कर अर्घ समर्पित किये। सायं कालीन बेला में मंगल आरती के कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्तिमय संगीत की धूनो पर खूब झूमे नाचे। धर्मसभा से पूर्व श्रेष्ठीजनों ने आचार्य विद्यासागर महाराज का चित्र अनावरण कर ज्ञान दीप प्रज्जवलित किया। मंगलाचरण रश्मि मोदी ने किया। पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पं. संतोष कुमार जैन अमृत ने कहा स्व और पर के कल्याण की भावना से किया गया त्याग ही दान है। वस्तु का पूर्णतः विसर्जन करना त्याग है।चैतन्य स्वरूप ध्रुव आत्मा में आने वाले विकारों को छोड़ना ही त्याग है। यह विकार अनंत चतुष्टय के वैभव को लूटने वाले है। भगवान महावीर की पियूष वाणी और प्रभु की देशना को आत्मसात करना है, यह जन-जन का कल्याण करने वाली है। धन से धर्म नहीं धर्म से धन की प्राप्ति होती है इसलिए धन को धर्म में लगाना चाहिए। हमारे देश में राग की नहीं त्याग की पूजा होती है। दान प्रशंसनीय और त्याग पूजनीय है। प्रसिद्ध होना सरल है लेकिन सिद्ध होना बहुत दुर्लभ है। धन की तीन गति दान भोग और नाश है, लेकिन फिर भी सभी धन संग्रह में लगे हैं। जबकि चक्रवर्ती का पुत्र भी चक्रवर्ती नहीं होता क्योंकि उसके साथ ही उसका वैभव नष्ट हो जाता है। नदी का पानी मीठा होता है क्योंकि वह अपने पानी का त्याग करती है और समुद्र का पानी खारा होता है क्योंकि वह अपने पानी का संग्रह करता है। दान पुण्यार्जन ही उत्तमोत्तम भोगों को प्रदान करेगा। व्यवहार से औषधि, आहार, अभय और ज्ञान चार प्रकार के दान हैं,जबकि निश्चय से राग द्वेष की क्रियाओं का सर्वथा त्याग दान है। वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से आये सजल भैया ने कहा पर पदार्थों का त्याग किये बिना संसार से पार नहीं हो सकते। हमनें पर पदार्थो को ग्रहण कर रखा है यदि उनका त्याग नहीं किया तो स्थिति भयावह होगी। त्याग सिद्ध पद को प्राप्त करने का मार्ग है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने सुन्दर प्रस्तुति दी एवं तम्बोला प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। जबकि वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक नाटिका एवं एक मिनट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।  सिद्ध क्षेत्र पावागिरि के उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य, अनंत चतुर्दशी महापर्व एवं जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया जायेगा। कार्यक्रम में अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन, शिखरचंद्र, राजकुमार, उत्तम चंद्र, आनंद कुमार, संदीप जैन, आदेश मोदी, मोंटी, वैभव, अक्षत जैन सहित सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन अनिल जैन एवं मयूर चौधरी ने किया। आभार व्यक्त अरुण मोदी एवं प्रवीन भंडारी ने किया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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