काव्य :
रावण कैसा होता है ?
बोला बेटा..
प्यारे पापा**
रावण कैसा होता है ??
क्या समझाते उसको मित्रो,
आंख का पानी मरा हुआ है,
फिर भी ज्ञानी बना हुआ है,
कामुकता जिसके नैनों में..
साधु चोला धरा हुआ है..
है ज्ञाता वह चतुर्वेद का,
अहंकार पर भरा हुआ है!
शक्तिवान है बहुत मगर वह,
अंदर अंदर डरा हुआ है!!
मरी आत्मा अंदर जिसकी,
बाहर से भी मरा हुआ है!!
उसके जैसा होता है!!
रावण वैसा होता है!!
- सुरेश गुप्त ग्वालियरी
विंध्य नगर बैढ़न
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