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काव्य : आत्मबोध - उमेन्द्र निराला सतना


 काव्य : 

आत्मबोध


अपनों में ही गिराने की आज़माइश है,

यह जानकर संभलना चाहिए था।


भाग कर आया है जहाँ से,

उसे तो ठहर जाना चाहिए था।


राह में हौसला-शिकन होंगे मगर,

टूटे हुए मन से लड़ना चाहिए था।


परेशान रहा यूँ ही मुसीबतों से,

हक़ीक़त जानकर मुस्कुराना चाहिए था।


इंतज़ार हो जब तुम्हारी हार का,

वहीं से जीत जाना चाहिए था।


जो बदलाव चाहते हैं दूसरों पर,

एक बार खुद को बदलना चाहिए था।


- उमेन्द्र निराला सतना (माध्यप्रदेश )

अध्ययन - इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराग (उ. प्र.)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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