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काव्य : जख्म कम थे मगर,दर्द ज्यादा रहा --सीताराम साहू'निर्मल'छतरपुर


 

काव्य : 

जख्म कम थे मगर,दर्द ज्यादा रहा

//////////////////पूर्णिका///////////

जख्म कम थे मगर,दर्द ज्यादा रहा।

जिन्दगी तेरा यह क्या, इरादा रहा। 


ज़िन्दगी आप कितना सता लीजिए,

कुछ कहूंगा नही मैं, ये वादा रहा। 


तुमनेंं ,ऊंचाइयां  भी दिखाई बहुत,

किन्तु जीवन मेरा सीधा सादा रहा। 


जिन्दंगी जुल्म जितने भी तेरे सहे,

जुल्म पर जुल्म मुझपे लवादा रहा। 


साथ  परछाइयां  भी  लगी छोड़ने,

जब अंधेरों का भी साथ आधा रहा। 


सभी निर्मल को अच्छा कहेंगे तभी,

जबतलक बोझ सबका में लादा रहा। 


- सीताराम साहू'निर्मल'छतरपुर मप्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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