काव्य :
23 मार्च - बलिदान दिवस
जो सूरज, हम देखते
वो सूरज है ,बलिदान का
अपमान ,जो सह न सके,
उन शहीदों के ,सम्मान का
उदित होते ,शक्तिपुंज,
ये ,भारत माँ की धरा पर,
राष्ट्र हित ,करते जाँ न्यौछावर,
ये होता ,केवल यहाँ पर
सपूत, माँ के दूध का,
कर्ज , हँस कर चुका गये,
भारत माता ,उन्हें खोजती,
उसे,मुक्त कर ,वो कहाँ गये
त्याग और बलिदान की,
हे शहीदों ,हो तुम ,अमिट कहानी
भारत की, धड़कन में हो तुम,
है देश की ,तुमसे जवानी
बालक,किशोर,युवा को,
प्रेरणा,उमंग ,तुमसे है
भगत,सुखदेव,राजगुरु,
ब्रज,तिरंगे का रंग, तुमसे है
नाज तुम पर, देश को है,
देश की ,तुम शान हो,
भारत माँ के ,सपूत अमर तुम,
हर जन का ,अतुल सम्मान हो
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