महर्षि दयानंद गुरुकुल आश्रम का त्रि-दिवसीय वार्षिकोत्सव और स्वामी अमृतानंद की प्रथम पुण्यतिथि पर हुआ भंडारा
इटारसी। महर्षि दयानंद आश्रम जमानी में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव और स्वामी अमृतानंद महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की पूर्णाहुति हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्वान उपदेशकों और आसपास के ग्रामीणों ने सहभागिता कर धर्म लाभ लिया।
संस्कारवान पीढ़ी के लिए संध्या उपासना जरूरी
पूर्णाहुति के दौरान उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने नई पीढ़ी के संस्कारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य धर्मों के लोग अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा देते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने बच्चों को वेद, दर्शन, गीता, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों की जानकारी देनी चाहिए। यदि हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो बच्चों को संध्या उपासना सिखाना अनिवार्य है। साथ ही, संकल्प लिया गया कि यज्ञ की परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रतिदिन घरों में यज्ञ किया जाना चाहिए।
यज्ञ के यजमान और विशिष्ट उपस्थिति
यज्ञ की पूर्णाहुति में मुख्य यजमान के रूप में अखिलेश शर्मा, हेमंत दुबे, रामविलास चौधरी और शालिग्राम चौधरी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ग्राम सरपंच और सुखराम कुमरे सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने आहुतियां दीं।
शारीरिक प्रदर्शन ने जगाईं पुरानी यादें
उत्सव के दौरान बच्चों द्वारा किए व्यायाम प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने जूडो, कराते और लाठी संचालन का ऐसा रोमांचक प्रदर्शन किया कि उपस्थित जनता ने पुरानी भारतीय सभ्यता और गौरवशाली अतीत को महसूस किया।
कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का आयोजन किया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के सफल संचालन में आसपास के ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा।
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