मर्यादा पुरुषोत्तम का शंखनाद: समुद्र लांघ लंका की दहलीज पर पहुंची वानर सेना
प्रलयंकारी गर्जना के साथ श्रीराम ने रखा लंका की सीमा में कदम, रामसेतु निर्माण के साथ ही अधर्म के अंत की उल्टी गिनती शुरू
श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का सप्तम दिवस
इटारसी। अधर्म के गढ़ लंका पर धर्म की पताका फहराने के लिए श्रीराम की वानर सेना, जामवंत के कुशल मार्गदर्शन और पवनपुत्र हनुमान के अदम्य साहस के बाद, अब स्वयं प्रभु श्री राम ने अपनी विशाल सेना के साथ लंका की भूमि पर प्रवेश किया। समुद्र पर बना ‘राम सेतु’ न केवल पत्थरों का मेल है, बल्कि अटूट श्रद्धा और विजय के विश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है। यह युद्ध केवल दो राजाओं का नहीं, बल्कि सत्य और असत्य के बीच का है। पत्थरों का तैरना इस बात का प्रमाण है कि जब हृदय में राम हों, तो मार्ग की हर बाधा हट जाती है। उक्त उद्गार श्रीमद प्रयागपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज ने श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर परिसर तुलसी चौक में 63वे वर्ष में श्री रामजन्म महोत्सव अंतर्गत जारी श्रीराम कथा के सप्तम दिवस बुधवार को व्यक्त किए।
श्रीराम कथा अंतर्गत महाराज जी बाल्मीकि एवं तुलसीदासकृत रामायण पर प्रवचन दे रहे हैं। व्यासपीठ से श्रोता के रूप में उपस्थित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी नागरिकों को संबोधित करते हुए कथा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि जब जामवंत जी की टुकड़ी को दक्षिण तट पर माता सीता के होने के प्रमाण मिले। हनुमान जी अपनी शक्तियां भूल चुके थे, तब जामवंत जी ने उनमें वह ऊर्जा भरी कि उन्होंने एक छलांग में विशाल समुद्र पार कर लिया। लंका पहुंचकर हनुमान जी ने न केवल माता सीता का पता लगाया, बल्कि रावण के अहंकार की लंका को राख में बदलकर यह संदेश दे दिया कि रघुकुल का कोप अब शांत नहीं होगा।
महाराज श्री ने कहा कि जब लंका जाने का मार्ग अवरुद्ध था, तब श्री राम के संकल्प और वानर सेना के श्रम ने असंभव को संभव कर दिखाया। नल और नील की देखरेख में पत्थरों पर 'राम' नाम अंकित कर समुद्र पर पुल का निर्माण किया गया। जब प्रभु राम ने अपनी सेना के साथ उस सेतु को पार किया, तो आकाश 'जय श्री राम' के उद्घोष से गूंज उठा। वहीं अशोक वाटिका में बैठीं माता सीता के लिए हनुमान जी का पहुंचना किसी संजीवनी से कम नहीं था। लंका दहन की अग्नि ने जहां असुरों में भय पैदा किया है, वहीं पीड़ितों के मन में न्याय की आस जगाई है।
आयोजन समिति के प्रवक्ता भूपेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एवं संरक्षक प्रमोद पगारे पत्रकार के मार्गदर्शन में श्री द्वारकाधीश मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री का स्वागत एवं पूजन समिति के अध्यक्ष नीरज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक, उपाध्यक्ष विष्णु शंकर पांडे, सचिव अभिषेक तिवारी, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र दुबे, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सहकोषाध्यक्ष अमित सेठ, घनश्याम तिवारी, देवेंद्र पटेल, दिनेश सैनी, सर्व ब्राम्हण समाज जिलाध्यक्ष जितेंद्र ओझा एवं साथी, मुंबई टॉप थर्टी गुरुकुलम, पूज्य पंचायत सिंधी समाज एवं सिंधु विकास समिति, सोनी समाज इटारसी, वैदेही मंडल जबलपुर, शुक्ला परिवार (संत निवास व्यवस्था), प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, आदर्श स्कूल नया यार्ड, शास. सीनियर अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास आदि के सदस्य एवं पदाधिकारियों सहित मंदिर समिति एवं आयोजन समिति पदाधिकारियों ने महाराज श्री का व्यासपीठ पर पूजन एवं स्वागत किया।
प्रवचन में हारमोनियम पर दिलीप जी, तबले पर दीपक दुबे, बैंजो पर श्रीराम जी, सहित संकटा प्रसाद मिश्र, दुर्गादत्त तिवारी एवं राहुल जी ने भजनों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी।
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