काव्य :
चंद उदासियां
हर एक के हिस्से में ,आती हैं चंद उदासियां।
खुशहाल भी होता कोई, भरता है कोई सिसकियां ।।
कभी तो खुली रह जातीं हैं,खुशियों की खिड़कियां ।।
जब आती रात पूनम,दिल पर बिखरें चंद्र रश्मियां।
प्राची से उदित सूरज, देता है सुनहरा प्रकाश ।।
हृदय प्रफुल्लित करता है, न होता इंसां उदास ।
नेकी करो तो हिस्से में,आता है सबके वंदन ।।
रहो कर्मयोगी बनकर ,जीवन हो जाता चंदन ।
झरनों की कल-कल से फूटें स्वर ,मधुरतम रागिनी।
झंकार से पाजेबों की ,झमझमा रही यामिनी ।।
जब मन में उठता संताप,हो जाता मानव व्यथित ।
मन को कहीं रमा कर,बन जाता "अकेला" पथिक ।।
- आनंद जैन "अकेला" , कटनी मध्यप्रदेश
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आदरणीय देवेंद्र जी सादर नमन अपने युवा प्रवर्तक में मेरी रचना को स्थान देकर सम्मानित किय मेरी रचना को आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
ReplyDeleteकवि आनंद जैन "अकेला",कटनी मध्यप्रदेश