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काव्य : चंद उदासियां - आनंद जैन "अकेला" , कटनी


 

काव्य : 

 चंद उदासियां


हर एक  के हिस्से में ,आती हैं चंद उदासियां।

खुशहाल  भी होता  कोई, भरता है कोई सिसकियां ।।


कभी तो खुली रह जातीं हैं,खुशियों की खिड़कियां ।।

जब आती रात पूनम,दिल पर बिखरें चंद्र रश्मियां।


प्राची से उदित सूरज, देता है सुनहरा प्रकाश ।।

हृदय प्रफुल्लित करता है, न होता इंसां उदास  ।


नेकी करो तो हिस्से में,आता है सबके वंदन ।।

रहो कर्मयोगी बनकर ,जीवन हो जाता चंदन ।


झरनों की कल-कल से फूटें स्वर ,मधुरतम रागिनी।

झंकार से पाजेबों की ,झमझमा रही यामिनी ।।


जब मन में उठता संताप,हो जाता  मानव व्यथित ।

मन को कहीं रमा कर,बन जाता "अकेला" पथिक ।। 


- आनंद जैन "अकेला" , कटनी मध्यप्रदेश

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. आदरणीय देवेंद्र जी सादर नमन अपने युवा प्रवर्तक में मेरी रचना को स्थान देकर सम्मानित किय मेरी रचना को आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
    कवि आनंद जैन "अकेला",कटनी मध्यप्रदेश

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