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महिला दिवस को समर्पित काव्य : अनेक रूपों में - पद्मा मिश्रा,जमशेदपुर


 महिला दिवस को समर्पित 

काव्य : 

अनेक रूपों में 


जब तुम 

थकान से आकुल-व्याकुल ,

पुकारते हो उसे -

शांति और सुकून की छाँह तलाशते,

अपेक्षित क्षुधा की तृप्ति के लिए ,

तब वह माँ बन जाती है-l

मन में उमड़ते संघर्षों -

विमर्शों के शमन हेतु,

चाहते हो कोई साथ,

वह मित्र बन तुम्हे संभालती है।

कभी बहन बन -तुम्हारे दुखों को ,

आँचल में संभालती ।

तुम्हारी मुस्कान बन जाती है।

अपने नन्हे हाथों से ,मचलती ,

गोद में आने की जिद करती -

बिटिया भी वही ,

दुनिया की भीड़ से अलग,

अपने मधुमय एकांत में -

पत्नी बन तुम्हे दुलारती नारी -

कदम से कदम मिलाती -

जिंदगी के ऊँचे-नीचे रास्तों पर ,

वह पत्नी,प्रिया,बहन,बेटी -

कितने रूपों में जीती है -एक साथ ,

स्वयं -सिद्धा बन कर .


-पद्मा मिश्रा,जमशेदपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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