काव्य :
बाल गीत
मध्यप्रदेश की गाथा
आओ बच्चों तुम्हे सुनाऊँ
मध्यप्रदेश की गाथा।
राजधानी भोपाल हमारी
और तालों से नाता।
हमको बड़ा लुभाता।।
उज्जैन, ओरछा, ओमकारेश्वर के
मंदिर बड़े निराले।
कान्हा, बाँधवगढ़ पार्क में
सिंह मिलें मतवाले।
बुलबुल, तोता, गिद्धों क झुण्ड
गीत 'पेंच' में गाता।
खजुराहो की मूर्तिकला का
रहा प्रेम से नाता।
आओ बच्चों......
जहाज, हिंडोला, रूपमति के
महल माण्डू में साजें।
माण्डवगढ़ दाखिल होने के
हैं बारह दरवाजे।
साँची, भोजपुर, उदयगिरी
पर्यटक सैलाब है आता।
ग्वालियर भूल-भुलैया का
कोई भी पार न पाता।
आओ बच्चों..............
भेड़ाघाट रूपहला झरना
पचमढ़ी झरनों की रानी।
पाँचों पाण्डव रहे जहाँ पे
पैरों की मिली निशानी।
अमरकंटक से बही नर्मदा
तीर्थ-स्थल कहलाता।
चंदेरी का किला पुराना
रात में कोई न जाता।
आओ बच्चों .........
लौहा मैग्नीज़, ताँबा कोयला
हीरा चम-चम वाले
मध्यप्रदेश में खनिज मिलें
पाईराइट स्लेट से काले
बेतवा, चम्बल, क्षिप्रा, नर्मदा
जन सैलाब नहाता
बुन्देली, बघेली, निमाड़ी, मालवी
गीत सभी कोई गाता
आओ बच्चों............
हिन्दी जो मिश्री सी मीठी
यही है अपनी भाषा।
प्रेम से मिलके रहे यहाँ पर
सभी करें ये आशा।
रानी अहिल्या, दुर्गावती हुईं
यहाँ वीरांगनाएँ माता।
माहेश्वरी, चंदेरी साड़ी में
हर रंग हमें सुहाता।
आओ बच्चों ......
'देवपुत्र'-संपादक जी, जो
ऊँची उढ़े उढ़ाने।
हर लेखक -मुख पर आज हैं
एक उन्हीं के गानें।
साहित्य अकादमी धूम मच गई
जुड़ा जो इनसे नाता ।
साहित्य अकादमी के बने निदेशक
'डाॅ विकास दवे' जी भ्राता।
आओ बच्चों.........
एक नवम्बर चलो मनाएँ
स्थापना दिवस हमारा।
मटकी, मुरिया, करें जावरा
नृत्य ये अपना प्यारा।
पोहा, जलेबी, मावा-बाटी
हर कोई है खाता।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं
'मोहन यादव' भ्राता।
आओ बच्चों............
- सीमा शिवहरे 'सुमन' ,भोपाल
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