काव्य :
ग़ज़ल
आप की बातें अलग हैं सच मगर बिलकुल अलग
है यहाँ सब कुछ वही लेकिन उधर बिलकुल अलग
आपने तो लिख दिया सच की विजय होती सदा
सत्य को मिलता परीक्षा में सिफ़र बिलकुल अलग
पंक्तियों में जो खड़ा है उसका नम्बर आएगा
और जिसका आएगा उस शख़्स का नम्बर अलग
रोशनी को आपने जब क़ैद मुट्ठी में किया
रात तो जाती नहीं है अब सहर बिलकुल अलग
आप मिलते हैं मुझे फिर किसलिए हर दिन जनाब
आप का रस्ता जुदा मेरा सफ़र बिलकुल अलग
रास्ते अपने मिलेंगे सिर्फ़ सच की राह पर
चल पड़ेंगे लोग सब होंगी डगर बिलकुल अलग
- किशन तिवारी भोपाल
9425604488
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