काव्य :
विश्व योग दिवस पर
------------------
साँस साँस सुरभित होगी
-----------------------
इंजी. अरुण कुमार जैन
----------------------
विश्व गुरु है राष्ट्र हमारा, तप,त्याग,साधना सौरभ है.
योग दिलाता हर उपलब्धि
यह भारत भू से सृजित है.
*********
ऋषभदेव ने हमें बताया, पतंजलि विस्तार दिया,
रामदेव,प्रमाण, प्रणम्य,
माँ अम्मा माता ज्ञान दिया.
तन, मन,वाणी स्वस्थ रहे,
चिंतन प्रेरक हो सबका,
शांति,यश,सम्मान दिलाता,योग दिलाता सुख सच्चा.
********
क्रोध, मोह,भय दूर रहेंगे,
अवसाद,विकलता न होगी,
जीवन में जो योग समाया
जीवन बगिया सुरभित होगी.
हर्ष, प्रेम, अनुराग विश्व से
सृजन के पथ जाओगे,
श्रेष्ठ सुखद व प्रेरक निधियाँ,
हर पल प्रिय, नित पाओगे
********
उषा बेला,शीतल वायु,
प्रमुदित मन, उठ सब कर लो,
लय,धुन पावन साँसो में हो,हर वांछित पूरा कर लो
नेह, प्रेम,अनुराग सुरभि जब,इस जीवन में आएगी
प्रगति, सफलता विजय श्री भी,
अपने संग वह लाएगी.
********
साथ मिलें सब, करें नित्य मिल
रोग, शोक सब दूर करें,
श्रेष्ठ धरा हो रामराज्य सी,
इस वसुधा पर सृजित करें
-----------------------
संपर्क //अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88 फ़रीदाबाद, हरियाणा.
मो. 7999469175
.jpg)
